रतलाम में ईद-मिलाद-उन-नबी पर निकलेगा पारंपरिक जुलूस सालों पुराने मार्ग से धूमधाम और अकीदत के साथ मनाएंगे जश्न 

Ratlam will host a traditional procession on Eid-Milad-un-Nabi, following the age-old route with pomp and devotion

रतलाम में ईद-मिलाद-उन-नबी पर निकलेगा पारंपरिक जुलूस सालों पुराने मार्ग से धूमधाम और अकीदत के साथ मनाएंगे जश्न 

डेली जर्नल हिंदी डेस्क 

रतलाम पैगंबर मोहम्मद साहब के यौम-ए-पैदाइश (जन्मदिन) यानी ईद-ए-मिलाद-उन-नबी के मुबारक मौके पर रतलाम शहर में मुस्लिम समाज द्वारा हर साल की तरह इस बार भी पारंपरिक जुलूस-ए-मोहम्मदी बेहद अकीदत, ज़ौक़ और धूमधाम के साथ निकाला जाएगा। इस वर्ष भी जुलूस शहर के सालों पुराने ऐतिहासिक और निर्धारित मार्ग से ही होकर गुज़रेगा। जुलूस का आरंभ आबकारी चौराहे से होगा, जो हरदेव लाला की पिपली, दिगंबर जैन तोपखाना मंदिर जी, गणेश देवरी, डालू मोदी बाज़ार, चिंतामण गणेश मंदिर, महलवाड़ा, सूरजपुल, मोचीपुरा, काज़ीपुरा, शेरानीपुरा, जमातखाना, आनंद कॉलोनी, कॉन्वेंट तिराहा, कोर्ट तिराहा, छत्रीपुल, स्टेशन रोड थाना, दो बत्ती, न्यू रोड, लोकेंद्र टॉकीज से होता हुआ शहर सराय पर समाप्त (समापन) होगा। रतलाम पुलिस द्वारा भी इस पूरे रूट पर सुरक्षा एवं ट्रैफिक व्यवस्था के लिए विशेष जनहित मार्ग निर्देश जारी किए गए हैं।

शहर क़ाज़ी की अपील: शांति, अनुशासन और 'स्वच्छ रतलाम' का दें संदेश

जुलूस को पुरअम्न और अनुशासित तरीके से संपन्न कराने के लिए शहर क़ाज़ी मोलवी सैयद अहमद अली साहब ने भी एक विशेष पत्र जारी कर मुस्लिम समाज और अकीदतमंदों से अपील की है। उन्होंने कहा कि दिनांक 26 अगस्त (बुधवार) को जश्न-ए-आमदे रसूल गुज़िश्ता सालों की तरह इस साल भी ज़ोरो-शोर से और शांति के साथ मनाया जाएगा। शहर क़ाज़ी ने जुलूस में शामिल होने वाले लोगों से आग्रह किया है कि वे इस्लामी लिबास ज़ेबे-तन करें, आका पर दरूद-ओ-सलाम पढ़ते रहें, खुशबू लगाएं और किसी भी तरह का शोर-शराबा न करें। साथ ही प्रशासन द्वारा तयशुदा रूट पर ही चलें और ट्रैफिक पुलिस को यातायात व्यवस्था बनाए रखने में पूरा सहयोग प्रदान करें।

एम्बुलेंस को रास्ता देने और सफाई का रखें विशेष ध्यान

शहर क़ाज़ी ने अपने पैगाम में समाज के ज़िम्मेदार नागरिक होने का फर्ज निभाने की ताकीद करते हुए कहा कि जुलूस के दौरान एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड और अन्य आपातकालीन सेवाओं में लगे वाहनों को प्राथमिकता से रास्ता दें। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि जुलूस की वजह से आमजन को किसी भी तरह की परेशानी न हो। इसके अलावा सड़कों पर कचरा न फेंककर "स्वच्छ रतलाम" के नारे को सार्थक बनाने की अपील की गई है। उन्होंने संदेश दिया कि "इस्लाम एक शांति का मज़हब है" और इस पैगाम को अपने अमल से ज़ाहिर करते हुए जुलूस को शांतिपूर्वक मुकम्मल बनाने में इंतज़ामिया कमेटियों का पूरा सहयोग करें।

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