पोषण आहार का कथित 800 करोड़ का घोटाला: लोकायुक्त सख्त, शीर्ष अधिकारी तलब, 24 अगस्त को कार्यवाही प्रतिवेदन के साथ उपस्थित होने के निर्देश
Alleged 800 crore nutrition food scam: Lokayukta takes strict action, summons top officials, directs them to appear with action report on August 24
डेली जर्नल हिंदी डेस्क
भोपाल/इंदौर, मध्यप्रदेश में पोषण आहार के कथित 800 करोड़ रुपये के घोटाले को लेकर लोकायुक्त कार्यालय ने कड़ा रुख अपनाया है। इस मामले में आगामी 24 अगस्त 2026 को पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा ग्रामीण आजीविका मिशन के शीर्ष अधिकारियों को कार्यवाही प्रतिवेदन (Action Taken Report) के साथ व्यक्तिगत रूप से तलब किया गया है।
पूर्व विधायक पारस सकलेचा की शिकायत पर हुई कार्रवाई
पूर्व विधायक पारस सकलेचा द्वारा महालेखाकार (AG) की वर्ष 2018 से 2021 के दौरान आठ जिलों में की गई जांच के आधार पर 28 अगस्त 2023 को लोकायुक्त के समक्ष एक विस्तृत शिकायत दर्ज कराई गई थी। इस शिकायत में तत्कालीन मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस तथा मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तत्कालीन संचालक ललित मोहन बेलवाल सहित अन्य संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
शिकायत के मुख्य बिंदु:
- ललित मोहन बेलवाल की कथित नियम-विरुद्ध संविदा नियुक्ति और उन्हें वित्तीय अधिकार दिया जाना।
- वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों की जांच में प्रतिकूल निष्कर्ष आने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई न होना।
- शिकायत उठाने वाले अधिकारियों को प्रताड़ित किए जाने के आरोप।
- पंचायत एवं ग्रामीण विकास, महिला एवं बाल विकास और ग्रामीण आजीविका मिशन की भूमिका का दस्तावेजी विवरण।
14 पत्रों और 5 बार समय मांगने के बाद भी विभाग रहा नाकाम
इस मामले में प्रशासनिक शिथिलता का एक बड़ा उदाहरण सामने आया है। लोकायुक्त कार्यालय द्वारा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग से जवाब मांगने के लिए अब तक 14 पत्र भेजे जा चुके हैं, जिसमें पहला पत्र 30 अक्टूबर 2023 को और चौदहवाँ पत्र 23 जून 2026 को भेजा गया था।
हैरानी की बात यह है कि विभाग ने स्वयं पाँच बार (20 नवंबर 2023, 14 अगस्त 2024, 15 अक्टूबर 2024, 13 नवंबर 2024 तथा 20 मार्च 2025) पत्र लिखकर एक से दो महीने का अतिरिक्त समय मांगा। लोकायुक्त द्वारा समय दिए जाने के बावजूद विभाग आज तक अपनी अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं कर सका है।
प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल: लगभग तीन वर्ष का समय बीत जाने, 14 अनुस्मारक पत्र जारी होने और पांच बार समय-वृद्धि मिलने के बाद भी प्रतिवेदन न सौंपना प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
लोकायुक्त की तल्ख टिप्पणी: जानकारी में विरोधाभास
लोकायुक्त कार्यालय ने महिला एवं बाल विकास विभाग और ग्रामीण आजीविका मिशन को भी कई अवसर दिए। 8 जून 2026 को महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा जो जानकारी प्रस्तुत की गई थी, उस पर माननीय लोकायुक्त ने स्पष्ट टिप्पणी की कि "प्रस्तुत जानकारी मांगी गई जानकारी के अनुरूप नहीं है तथा उसमें विरोधाभास है।" इसके बाद ही प्रमुख सचिव (महिला एवं बाल विकास) और मुख्य कार्यपालन अधिकारी (ग्रामीण आजीविका मिशन) को 24 अगस्त को तलब किया गया है।
जनहित और बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़ा संवेदनशील मामला
पूर्व विधायक पारस सकलेचा ने कहा कि बार-बार समय देने के बाद भी वर्षों तक रिपोर्ट न सौंपना केवल ढिलाई नहीं, बल्कि पूरी जांच प्रक्रिया की शुचिता पर सवाल है। पोषण आहार जैसे संवेदनशील विषय से प्रदेश की लाखों माताओं और बच्चों का स्वास्थ्य जुड़ा है। ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की अनियमितता या देरी केवल प्रशासनिक विषय नहीं, बल्कि जनहित और सार्वजनिक विश्वास से जुड़ा अत्यंत गंभीर प्रश्न है। उन्होंने उम्मीद जताई कि 24 अगस्त की सुनवाई में विभाग संपूर्ण तथ्यों के साथ उपस्थित होंगे।
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