टोल कंपनियों को भारी मुनाफा, फिर भी जनता से वसूली क्यों? अजय सिंह ने सरकार से माँगा जवाब, ₹10 का शेयर पहुँचा ₹1.26 लाख के पार! टोल कंपनियों की बंपर कमाई पर उठे सवाल
Toll companies are making huge profits, yet why are they extorting money from the public? Ajay Singh demanded an explanation from the government.
टोल कंपनियां भारी मुनाफे में, फिर क्यों जारी टोल वसूली?, देवास भोपाल टोल रोड के ₹10 के एक शेयर का मूल्य ₹ 126691/-, जावरा नयागांव टोल रोड के 287 करोड़ के शेयर ₹691 करोड़ में बीके, विदेशी कंपनियों ने जमकर किया निवेश, अजय सिंह ने सरकार से पूछे कई कानूनी और वित्तीय सवाल
डेली जर्नल हिंदी डेस्क
भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष एवं चुरहट विधायक अजय सिंह 'राहुल भैया' ने प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह को पत्र लिखकर भोपाल–देवास, जावरा–नयागांव तथा लेबड़–जावरा टोल परियोजनाओं को लेकर गंभीर वैधानिक व वित्तीय सवाल उठाए हैं। उन्होंने विधानसभा में मंत्री द्वारा दिए गए लिखित उत्तरों और ऑडिट रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि ये तीनों टोल कंपनियाँ लगातार बंपर ऑपरेटिंग प्रॉफिट कमा रही हैं। ऐसे में इन परियोजनाओं को घाटे में बताकर जनता से लगातार टोल वसूलना पूरी तरह से तथ्यों और अभिलेखों के विपरीत है।
अजय सिंह ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि भोपाल–देवास टोल परियोजना की शेयर पूंजी पुनर्गठन के समय फरवरी 2023 में एनसीएलटी (NCLT) ने ₹10 के शेयर का बाजार मूल्य ₹1,26,691 निर्धारित किया था। वहीं जावरा–नयागांव परियोजना में अशोका कंस्ट्रक्शन लिमिटेड ने लगभग ₹287 करोड़ के शेयर ₹691 करोड़ में बेचे। इसके अलावा विदेशी निवेशकों ने भी भारी निवेश किया है। राहुल भैया ने कहा कि यदि कंपनियाँ सचमुच घाटे में होतीं, तो न विदेशी निवेशक आते, न इनके शेयर इतने महंगे बिकते और न ही कंपनियाँ शेयरधारकों को करोड़ों का लाभांश (डिविडेंड) व भारी आयकर दे पातीं।
ऑपरेटिंग प्रॉफिट ₹194 करोड़ पार, फिर भी "कुल वास्तविक व्यय" के नाम पर भ्रम फैलाने का आरोप
अजय सिंह ने भोपाल–देवास टोल परियोजना के वित्तीय आंकड़े साझा करते हुए बताया कि वर्ष 2018-19 से 2023-24 के दौरान ₹10 के प्रति शेयर पर कमाई ₹3,674 से बढ़कर ₹10,474 तक पहुँच गई। इसी अवधि में कंपनी का ऑपरेटिंग प्रॉफिट ₹90.87 करोड़ से बढ़कर ₹194.82 करोड़ हो गया। कंपनी ने हाल के वर्षों में ₹117.84 करोड़ और ₹83.25 करोड़ का लाभांश भी बांटा। उन्होंने विभाग द्वारा पेश किए गए "कुल वास्तविक व्यय" के आंकड़े पर सख्त आपत्ति जताते हुए कहा कि बीओटी (BOT) अनुबंध या ऑडिटेड बैलेंस शीट में ऐसी किसी मद का प्रावधान ही नहीं है। यह केवल सीए के जरिए अनऑडिटेड बुक्स के आधार पर बनवाया गया प्रमाण-पत्र है, जिसका उद्देश्य जनता को गुमराह करना है।
अनुबंध की शर्तों के उल्लंघन पर घेरा; पूछा- जब प्रमोटर हट सकते हैं, तो टोल क्यों बंद नहीं हो सकता?
चुरहट विधायक ने सरकार को नियमों की याद दिलाते हुए कहा कि 11 मई 2017 के आदेशानुसार प्रमोटरों को कम से कम 26% शेयरधारिता रखनी अनिवार्य थी, जबकि तीनों परियोजनाओं के प्रमोटर 2015-16 में ही पूरी हिस्सेदारी बेचकर बाहर हो चुके थे। उन्होंने सवाल दागा कि जब सरकार प्रमोटर शेयरधारिता जैसी अहम शर्त में बदलाव कर सकती है, तो लागत से कई गुना अधिक वसूली होने के बाद टोल समाप्त करने का फैसला क्यों नहीं ले सकती?
3 मार्च 2023 के विधानसभा उत्तर का उल्लेख करते हुए उन्होंने याद दिलाया कि तत्कालीन पीडब्ल्यूडी मंत्री ने माना था कि बीओटी एक व्यावसायिक अनुबंध है, जिसमें लाभ-हानि का जोखिम निवेशक का होता है। अजय सिंह ने सरकार से स्पष्ट करने की मांग की है कि जब अनुबंध में सीए के प्रमाण-पत्र या लागत के पुनर्मूल्यांकन का कोई वैधानिक प्रावधान नहीं है, तो किस कानूनी आधार पर कंसेशनायर के तथाकथित "वास्तविक व्यय" को मानकर जनता पर टोल वसूली थोपी जा रही है?