यास्मीन शेरानी गोलीकांड: 12 साल बाद जिला न्यायालय का अहम फैसला, मुख्य आरोपी वैभव बैरागी को 10 वर्ष की सजा
Yasmin Sherani shooting case: District Court issues crucial verdict after 12 years; main accused Vaibhav Bairagi sentenced to 10 years in prison
सप्तम अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने सुनाया फैसला, दो आरोपी साक्ष्य के अभाव में बरी
डेली जर्नल हिंदी डेस्क
रतलाम। रतलाम नगर निगम परिसर में करीब 12 वर्ष पूर्व कांग्रेस नेत्री एवं तत्कालीन पार्षद/नेता प्रतिपक्ष यास्मीन शेरानी पर दिनदहाड़े हुई जानलेवा फायरिंग के बहुचर्चित मामले में शनिवार को जिला न्यायालय ने ऐतिहासिक निर्णय सुनाया। सप्तम अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजेश नामदेव की अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य आरोपी वैभव बैरागी और उसके सहयोगी चंदन शर्मा को दोषी करार देते हुए 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। वहीं, पिस्टल छिपाने के आरोपी तरुण सांकला को आर्म्स एक्ट के तहत 3 वर्ष के सश्रम कारावास से दंडित किया गया। हालांकि, पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में न्यायालय ने अनुराग लोखंडे और हरिओम मारू को दोषमुक्त कर दिया।
प्रतिशोध में रची गई थी हमले की साजिश, 11 माह बाद पुलिस ने किया था खुलासा
यह पूरी घटना 27 सितंबर 2014 की दोपहर की है, जब यास्मीन शेरानी नगर निगम भवन से बाहर निकल रही थीं, तभी घात लगाए हमलावर ने उन पर गोलियां चला दी थीं। घटना के करीब 11 माह बाद तत्कालीन एसपी अविनाश शर्मा के मार्गदर्शन में पुलिस टीम ने मामले का पर्दाफाश किया था। जांच में सामने आया था कि 2013 के सहिर शेरानी हत्याकांड में आरोपी रहे वैभव बैरागी को यह शक था कि यास्मीन शेरानी उसे सजा दिलाने के लिए सक्रिय प्रयास कर रही हैं। इसी बदले की भावना से जमानत पर बाहर आने के बाद उसने अपने साथी चंदन शर्मा (तत्कालीन एसआई के पुत्र) के साथ मिलकर इस सनसनीखेज वारदात को अंजाम दिया था।
वैज्ञानिक साक्ष्यों से सुलझी थी गुत्थी, आईजी ने घोषित किया था 30 हजार का इनाम
निगम परिसर में गोली मारने के बाद वैभव अपने साथी चंदन के साथ बाइक पर सवार होकर फरार हो गया था। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सैकड़ों लोगों से पूछताछ की, कॉल डिटेल खंगाली और वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए। स्टेशन रोड थाना पुलिस, सीएसपी और सायबर सेल की संयुक्त टीम की कड़ी मेहनत के बाद आरोपियों को पिस्टल और बाइक सहित गिरफ्तार किया गया था। इस हाई-प्रोफाइल सफलता पर तत्कालीन आईजी द्वारा पुलिस टीम को 30 हजार रुपये का नकद पुरस्कार देने की घोषणा भी की गई थी।
घटना के बाद शहर में भड़क उठा था उपद्रव, 10 दिनों तक लगा रहा था कर्फ्यू
यास्मीन शेरानी पर हुए इस हमले के बाद शहर का माहौल अत्यधिक तनावपूर्ण हो गया था। घटना के तुरंत बाद शहर में सांप्रदायिक उपद्रव भड़क उठा था, जिसमें बस स्टैंड के पास बजरंग दल के तत्कालीन जिला सह-संयोजक कपिल राठौड़ और उनके कर्मचारी पुखराज की निर्मम हत्या कर दी गई थी। इस हिंसा और बिगड़ती कानून व्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए रतलाम शहर में लगातार 10 दिनों तक कर्फ्यू लगाना पड़ा था। वर्षों चली अदालती कार्रवाई के बाद शनिवार को आए इस फैसले से इस चर्चित प्रकरण का विधिक पटाक्षेप हो गया है।