पीएम आवास खाली कराने पर पूर्व विधायक पारस सकलेचा का बड़ा हमला: बोले– नगर निगम का पंचनामा नहीं, यह 'प्रपंचनामा' है

Former MLA Paras Saklecha's big attack on vacating PM's residence: Said- This is not the Municipal Corporation's Panchnama, it is a 'Prapanchnama

पीएम आवास खाली कराने पर पूर्व विधायक पारस सकलेचा का बड़ा हमला: बोले– नगर निगम का पंचनामा नहीं, यह 'प्रपंचनामा' है

"208 फ्लैट खाली थे तो 4 ट्रैक्टर सामान किसका जब्त हुआ?"— सकलेचा ने उठाए प्रशासनिक कार्रवाई पर गंभीर सवाल

डेली जर्नल हिंदी डेस्क 

रतलाम, प्रधानमंत्री आवास योजना के 208 फ्लैटों को खाली कराने के लिए नगर निगम द्वारा की गई कार्रवाई और तैयार किए गए पंचनामे पर पूर्व विधायक पारस सकलेचा ने गहरा आक्रोश व्यक्त किया है। एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए उन्होंने नगर निगम के पंचनामे को "प्रपंचनामा" करार दिया। सकलेचा ने कहा कि पंचनामे में नगर निगम ने दावा किया है कि 'सभी फ्लैट पूर्णतः खाली हैं और वहाँ किसी का कब्जा या घरेलू सामान नहीं था।' इस पर सवाल उठाते हुए उन्होंने पूछा कि यदि फ्लैट खाली थे, तो नगर निगम ने कार्रवाई के दौरान चार ट्रैक्टर भरकर घरेलू सामान और फर्नीचर रैन बसेरा में क्यों भेजा? आज भी मल्टी के नीचे बरामदे में किसका सामान लावारिस पड़ा हुआ है?

नोटिस अवधि खत्म होने से पहले ही कब्जा लेने का आरोप; पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका पर घेरा

पारस सकलेचा ने पूरी प्रक्रिया को विधि-विरुद्ध बताते हुए कहा कि नगर निगम ने अपने ही नोटिस का पालन नहीं किया। 31 जुलाई को 3 कार्य दिवस का नोटिस चस्पा किया गया था, जो शनिवार और रविवार की छुट्टी के कारण 5 अगस्त को पूरा हो रहा था। इसके बावजूद 3 अगस्त को ही कब्जा लेने का कार्यालयीन आदेश जारी कर दिया गया और 5 अगस्त की सुबह 9 बजे से ही गरीबों का सामान बाहर फेंककर ताले लगाने की कार्रवाई शुरू कर दी गई। उन्होंने सवाल किया कि कब्जा लेने के बाद किस नियम के तहत तारीखों को 31 अगस्त तक बढ़ाया गया?

सकलेचा ने मौके पर मौजूद एसडीएम, तहसीलदार और पुलिस अधिकारियों की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने पूछा कि क्या अधिकारियों ने इस कार्रवाई की वैधानिक जांच की थी कि नगर निगम को सामान बाहर फेंकने का कानूनी अधिकार है भी या नहीं? ढाई सौ निगम कर्मियों और डेढ़ सौ पुलिसकर्मियों के बल पर गरीब व दलित परिवारों को बेदखल करना प्रशासनिक शक्ति प्रदर्शन नहीं, बल्कि लोकतंत्र और संविधान का उल्लंघन है।