नीट-UG विवाद: पारस सकलेचा ने की मांग- 'परीक्षा निरस्तीकरण का कारण सार्वजनिक करें, बेदाग छात्रों को मिले परीक्षा चुनने का विकल्प'

NEET-UG controversy: Paras Saklecha demands 'Make public the reason for exam cancellation, give clean students the option to choose the exam

नीट-UG विवाद: पारस सकलेचा ने की मांग- 'परीक्षा निरस्तीकरण का कारण सार्वजनिक करें, बेदाग छात्रों को मिले परीक्षा चुनने का विकल्प'

डेली जर्नल हिंदी डेस्क 

व्यापम व्हिसलब्लोअर एवं पूर्व विधायक पारस सकलेचा ने कहा कि नीट-UG 2026 परीक्षा को निरस्त कर  जांच सीबीआई को सौंपना , बड़े लोगों को बचाने का षड्यंत्र है  । 23 लाख विद्यार्थी का समय प्रभावित हुआ , आर्थिक नुकसान के साथ पुनः परीक्षा का मानसिक तनाव उत्पन्न हुआ और एनटीए ने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का पालन नहीं किया कि  'निर्णय जितना व्यापक प्रभाव वाला होता है, उसके कारण उतने ही स्पष्ट होना चाहिए* ! '  यह व्यापम घोटाले का नया संस्करण है । 

सकलेचा ने कहा कि नेशनल टेस्टींग एजेंसी द्वारा परीक्षा निरस्त करने के लिए केंद्र सरकार को‌ भेजे गये प्रस्ताव, पत्र या रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाना चाहिए । लगभग 23 लाख बच्चों , जिन्होंने वर्षों की तैयारी के बाद परीक्षा दी है, को यह जानने का अधिकार है कि , किस एजेंसी की जांच के आधार पर परीक्षा निरस्त की गई, किस-किस केंद्र पर किस प्रकार की अनियमितता हुई । केवल आधिकारिक बयान तो *मखमल में टाट का पेबंद* है । 

सकलेचा ने आरोप लगाया कि वर्ष 2022 से 2026 के बीच नीट परीक्षा में पररूपधारण (Impersonation), स्कोरर नेटवर्क, पेपर सुरक्षा संबंधी प्रश्न, उत्तर-पत्रक में हेरफेर, रोल नंबर सेटिंग, फर्जी प्रमाण-पत्रों का उपयोग तथा परीक्षा केंद्र आवंटन आदि फर्जीवाड़ा जमकर हुआ है , और उसे दबाने , तथा बड़े लोगों को बचाने के लिए जांच सीबीआई को सौंपी गई है जो केंद्र सरकार का तोता है । और सीबीआई ने यही कार्य बखुबी व्यापम घोटाले में भी किया है ।

सकलेचा ने कहा कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने 2 मई को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि सोशल मीडिया की एक्टिव मॉनिटरिंग की गई है , 65 से ज्यादा टेलीग्राम चैनल को विद्यार्थी को भ्रमित करने और फर्जी प्रश्नपत्र जारी करने पर ब्लॉक कर जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई के लिए सायबर क्राइम अथारिटी को शिकायत दर्ज कराई गई है ‌। उसके बाद भी सोशल मीडिया के माध्यम से फर्जीवाड़ा हो जाना यह दिखाता है कि एनटीए में ही *दाल में काला* है ।

सकलेचा ने बताया कि एनटीए के पोर्टल पर उल्लेखित सार्वजनिक सूचना में किसी भी सूचना , विज्ञप्ति में दिनांक का उल्लेख नहीं है । 27 मई की  पहले तथा 10 मई की बाद में अंकित है । 12 मई की प्रेस विज्ञप्ति के बाद 10 मई  का उल्लेख है । 10 मई की प्रेस विज्ञप्ति में दिनांक तथा जारी करने वाले के हस्ताक्षर नहीं है। इससे साफ जाहिर है की पोर्टल पर योजनाबद्ध तरीके से बाद में सूचना ‌डाली  गई है ।

सकलेचा ने कहा कि 10 मई की तथाकथित विज्ञप्ति में बताया कि 3 मई को पूर्ण सुरक्षा के मापदंड अनुसार परीक्षा हुई । 7 मई की रात्रि को  परीक्षा में फर्जीवाडे का इनपुट मिला । 8 मई  को  केंद्रीय एजेंसी , जिसके नाम का उल्लेख नहीं किया गया , को वेरिफिकेशन कर कार्रवाई करने के लिए कहा गया । 12 मई की प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि भारत सरकार  ने परीक्षा निरस्त कर , सीबीआई को जांच के लिए प्रकरण देने का निर्णय लिया । 12 मई की विज्ञप्ति में यह उल्लेख ही नहीं है कि किस प्रकार का फर्जीवाड़ा , किस राज्य के किन-किन परीक्षा केंद्रों , पर पाया गया । किसी भी लॉ एनफोर्समेंट एजेंसी का नाम का उल्लेख किए बिना , मात्र यह उल्लेख किया गया कि present examination process could not be allowed to stand 

सकलेचा ने कहां की एनटीए‌ ने परीक्षा निरस्ती  पर पारदर्शी , तर्कसंगत और कारणयुक्त निर्णय प्रस्तुत करने का विधिक दायित्व नहीं निभाया है । और यह सारा काम एक सोची-समझी साजिश के तहत हुआ है ।‌ 

सकलेचा ने मांग की है कि एनटीए  3 मई की परीक्षा के परिणाम 21 मई की परीक्षा के साथ घोषित करें । 3 मई की परीक्षा में दागी विद्यार्थियों को चिन्हित कर , बेदागी विद्यार्थियों को यह अवसर प्रदान करें कि वह 3 मई और 21 मई की  परीक्षा में से जिस परीक्षा के प्राप्तांक को चाहे , उसे स्वीकार कर सकता हैं । और उस अनुसार प्राविण्य सूची बनाई जाय।

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