प्रशासनिक अस्थिरता का शिकार रतलाम: 10 महीने में ही कलेक्टर मिशा सिंह की विदाई, अब रतलाम की अजय कटेसरिया को कमान
Ratlam Collectors' 'Musical Chairs': Sixth in 5 years, is the disapproval of politicians the reason for the transfers?
डेली जर्नल हिंदी डेस्क
रतलाम। मध्य प्रदेश के रतलाम जिले में प्रशासनिक स्थिरता मानो एक सपना बनकर रह गई है। हाल ही में हुए प्रशासनिक फेरबदल के बाद अजय कटेसरिया को रतलाम का नया कलेक्टर नियुक्त किया गया है। लेकिन इस नई नियुक्ति के साथ ही जिले के सियासी और प्रशासनिक गलियारों में एक पुरानी चर्चा फिर गर्म हो गई है—आखिर रतलाम में कोई भी कलेक्टर एक साल से ज़्यादा क्यों नहीं टिक पाता?
जिले की प्रशासनिक कार्यशैली को देखें तो ऐसा प्रतीत होता है कि रतलाम में नेताओं द्वारा अपनी पसंद के अधिकारियों की 'परख' की जाती है। जब तक तालमेल बैठता है, ठीक; लेकिन जैसे ही कोई अधिकारी नियम-कायदों पर अड़ जाता है या स्थानीय नेताओं के 'बस का' नहीं रहता, तो आलाकमान तक शिकायत पहुँचने में देर नहीं लगती। इसके बाद शुरू होता है नेताओं की नापसंदगी का खेल और फिर परिणाम—एक और कलेक्टर का तबादला।
तबादले का गणित: 5 साल में 6 IAS अधिकारी
पिछले 5 वर्षों के आँकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति हैरान करने वाली है। इस अवधि में 6 अलग-अलग आईएएस (IAS) अधिकारियों ने रतलाम की कमान संभाली है:
1 अजय कटेसरिया - जुलाई 2026 से (वर्तमान)
2.मिशा सिंह - अक्टूबर 2025 से जुलाई 2026
3. राजेश बाथम मार्च 2024 से अक्टूबर 2025
4. भास्कर लक्षकार - अक्टूबर 2023 से मार्च 2024
5. नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी - मई 2022 से अक्टूबर 2023
6. कुमार पुरुषोत्तम - मई 2021 से मई 2022
मिशा सिंह भी नहीं पूरा कर पाईं एक साल का कार्यकाल
ताज़ा फेरबदल में रतलाम की पूर्व कलेक्टर मिशा सिंह को यहाँ से हटाकर शाहडोल कलेक्टर बनाया गया है। वह अक्टूबर 2025 में जिले की कमान सँभालने आई थीं और जुलाई 2026 में ही उनका तबादला कर दिया गया। यानी वह अपना एक साल का कार्यकाल भी पूरा नहीं कर सकीं।
इससे पहले श्री भास्कर लक्षकार तो मात्र 5 महीने ही रतलाम के कलेक्टर रह पाए थे। औसतन हर 10 से 12 महीने में कलेक्टर का बदल जाना इस बात की ओर इशारा करता है कि यहाँ प्रशासनिक फैसलों से ज़्यादा सियासी तालमेल को अहमियत दी जा रही है।
विकास कार्यों पर पड़ता है असर
बार-बार कलेक्टर बदलने से जिले की लंबी अवधि की योजनाएँ और विकास कार्य बुरी तरह प्रभावित होते हैं। जब तक नया अधिकारी जिले की भौगोलिक स्थिति, समस्याओं और जनहित के मुद्दों को समझ पाता है, तब तक उसके रवानगी के आदेश आ जाते हैं। अब देखना यह दिलचस्प होगा कि नए कलेक्टर अजय कटेसरिया रतलाम में प्रशासनिक और राजनीतिक तालमेल बिठाकर कितने समय तक अपनी सेवाएँ दे पाते हैं, या वे भी इस 'कुर्सी दौड़' का अगला शिकार बनते हैं।
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