धराड़ हिंसा मामला: असली हमलावर आज़ाद और पीड़ितों पर एफआईआर? बिलपांक पुलिस की निष्पक्षता पर उठे गंभीर सवाल, न्याय की गुहार लेकर एसपी दफ्तर पहुंचीं महिलाएं
Dharad incident: Police action raises questions. The victim's side, having seen the station in-charge's application, pleads for justice. If no action is taken, they will meet the SP and complain
डेली जर्नल हिंदी डेस्क
रतलाम, जिले के बिलपांक थाना अंतर्गत ग्राम धराड़ (भातोड़ा ग्रिड) में हुई हिंसक घटना ने अब तूल पकड़ लिया है। शुक्रवार को पीड़ित पक्ष की महिलाओं और ग्रामीणों ने एसपी अमित कुमार के नाम एक शिकायती आवेदन सौंपकर बिलपांक पुलिस पर 'एकतरफा' और 'पक्षपातपूर्ण' कार्रवाई करने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
शादी वाले घर में हमला और पथराव का आरोप
शिकायत के मुताबिक, घटना 14 अप्रैल 2026 की रात की है। प्रार्थी के घर में विवाह समारोह चल रहा था। आरोप है कि कुछ असामाजिक तत्वों ने सोची-समझी साजिश के तहत मुस्लिम समाज के युवकों को रास्ते में रोककर उनके नाम पूछे और मारपीट की। इसके बाद कथित तौर पर कट्टरपंथी संगठनों से जुड़े बाहरी लोगों की भीड़ इकट्ठा कर प्रार्थी के घर पर पथराव किया गया, घर में तोड़फोड़ की गई और महिलाओं के साथ अभद्रता व मारपीट की गई।
असली हमलावर बाहर, पीड़ितों पर एफआईआर
आवेदन में सबसे गंभीर आरोप पुलिस प्रशासन पर लगाया गया है। पीड़ितों का कहना है कि पुलिस ने दबाव में आकर केवल एक पक्ष याने मुस्लिम समाज के 11 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। दिए गए आवेदन के अनुसार वास्तविक हमलावर और आदतन अपराधी, जिनमें कबीर वाघेला, आदित्य वर्मा और हिंदूवादी नेता प्रखंड गौ रक्षा प्रमुख रूप सिंह चंद्रावत, अशोक पाटीदार, त्रिलोक प्रजापत, बादल राणा, वीरेंद्र सिंह, विजय प्रजापत, राहुल सीरवी, बबलू वाघेला, अनिल सीरवी, आदित्य वर्मा, धर्मेंद्र सिंह, देव चावड़ा, घुवीर सिंह चावड़ा, हिस्ट्री शीटर विनोद योगी (आदतन अपराधी आदि शामिल है। इनके खिलाफ अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। पुलिस ने कथित तौर पर झूठी धाराओं में मामला दर्ज किया है, जो संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) का उल्लंघन है।
BNS की गंभीर धाराओं में FIR की मांग
पीड़ित पक्ष ने मांग की है कि नामजद आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 191, 192, 196, 351, 352, 326, 331, 74, 79 के तहत मामला दर्ज किया जाए। साथ ही, महिलाओं के साथ हुई छेड़छाड़ और मारपीट के संबंध में भी सख्त कार्रवाई की जाए।
इन अधिकारियों तक भी पहुंचा है मामला
न्याय की आस में ग्रामीणों ने इस आवेदन की प्रतिलिपि DGP (मध्य प्रदेश), आईजी (उज्जैन), डीआईजी (रतलाम) और एसडीओपी को भी भेज दी गई है। पीड़ितों ने चेतावनी दी है कि यदि इस मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच नहीं हुई, तो न्याय की प्रक्रिया पर से आमजन का विश्वास उठ जाएगा।