नीट घोटाला: व्यापमं पार्ट-2? CBI जांच की सुस्त रफ्तार पर उठे सवाल, क्या 'बड़े मगरमच्छों' को बचाने की हो रही है कोशिश?
NEET scam: Vyapam Part 2? Questions raised over the slow pace of the CBI investigation. Is an attempt being made to protect the 'big crocodiles
डेली जर्नल हिंदी डेस्क
नई दिल्ली, देश के लगभग 23 लाख विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ा NEET (नीट) परीक्षा घोटाला अब 'व्यापमं पार्ट-2' का रूप लेता दिख रहा है। परीक्षा रद्द हुए और सीबीआई जांच शुरू हुए 80 दिन से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन जांच एजेंसी के हाथ अब तक केवल 13 आरोपियों तक ही पहुँच पाए हैं। कार्रवाई की इस धीमी चाल को लेकर अब सरकार और NTA (राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी) की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। छात्र और अभिभावक पूछ रहे हैं कि आखिर असली गुनहगारों और 'बड़े मगरमच्छों' को बचाने के लिए तथ्यों को सार्वजनिक करने से क्यों बचा जा रहा है?
47 संविदा अधिकारियों पर रहस्य: नाम और भूमिका क्यों छिपाई जा रही?
कांग्रेस नेता और पूर्व विधायक पारस सकलेचा ने छात्रों के हित में सवाल खड़े करते हुए कहा कि NTA की कार्यप्रणाली पर सबसे बड़ा सवाल 47 संविदा (Contractual) अधिकारियों को लेकर उठ रहा है। यदि इन अधिकारियों को गड़बड़ी के चलते हटाया गया है, तो सरकार स्पष्ट करे कि उनके नाम, पद और ज़िम्मेदारियाँ क्या थीं? अभ्यर्थियों की मांग है कि सरकार यह सार्वजनिक करे कि इन अधिकारियों को किन शर्तों पर हटाया गया, क्या उनके खिलाफ कोई विभागीय या कानूनी जांच चल रही है, और क्या उनके विदेश भागने पर रोक लगाने के लिए लुकआउट नोटिस जारी किया गया है?
80 दिन बाद भी CBI जांच पर उठते सवाल
जांच की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए युवाओं ने पूछा है कि 80 दिनों की सीबीआई जांच के दौरान NTA कार्यालय में किस स्तर तक पड़ताल की गई?
NTA दफ़्तर पर कब-कब छापे मारे गए और किन शीर्ष अधिकारियों से पूछताछ हुई?
जांच के दौरान कौन-कौन से गोपनीय दस्तावेज़, कंप्यूटर और हार्ड डिस्क ज़ब्त किए गए?
क्या NTA के बड़े अधिकारियों से गहन पूछताछ हुई, या जांच केवल निचले स्तर के कर्मचारियों तक ही सीमित रखी गई है?
NTA की सुरक्षा व्यवस्था के दावों की खुली पोल
NTA ने पूर्व में दावा किया था कि देश-विदेश के 551 शहरों में 5,432 केंद्रों पर हुई इस परीक्षा के लिए 6,000 ऑब्जर्वर और 2 लाख कर्मचारियों को तैनात किया गया था। यहाँ तक कि 65 टेलीग्राम चैनलों को ब्लॉक करने और सोशल मीडिया पर 24 घंटे निगरानी का दावा भी किया गया था। ऐसे में बड़ा प्रश्न यह है कि जब सुरक्षा का इतना कड़ा पहरा था, तो इतना बड़ा राष्ट्रीय स्तर का घोटाला कैसे संभव हो गया?
पारदर्शिता की मांग: सार्वजनिक किए जाएं आधारभूत दस्तावेज
4-5 साल तक दिन-रात मेहनत करने वाले 23 लाख छात्रों को यह जानने का पूरा अधिकार है कि परीक्षा किस आधार और किस जांच रिपोर्ट के तहत निरस्त की गई। छात्रों ने सरकार और NTA से मांग की है कि:
परीक्षा निरस्त करने का मूल प्रस्ताव और जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
केंद्र सरकार को भेजे गए सभी प्रासंगिक दस्तावेज़ उजागर किए जाएं।
परीक्षा परिणाम, मेरिट विश्लेषण और अनियमितताओं का शहरवार विवरण देश के सामने रखा जाए।
23 लाख युवाओं का भविष्य केवल सरकारी बयानों और खोखले दावों से सुरक्षित नहीं हो सकता। इसके लिए तथ्यों, दस्तावेजों और पूर्ण पारदर्शिता की आवश्यकता है। देश का हर छात्र एक निष्पक्ष जांच और जवाबदेही का हकदार है।