फर्जी फर्म के जरिए ₹17 लाख का बैंक लोन ऐंठने वाले आरोपी जाकिर हुसैन को 7 साल तक का कारावास
Zakir Hussain, accused of extorting ₹17 lakh in bank loans through a fake firm, has been sentenced to seven years in prison
डेली जर्नल हिंदी डेस्क
रतलाम। फर्जी दस्तावेज और काल्पनिक फर्म बनाकर बैंक से ₹17 लाख की धोखाधड़ी करने वाले आरोपी जाकिर हुसैन पिता मोहम्मद हुसैन निवासी उम्र 55 वर्ष, निवासी 63 पीएनटी कॉलोनी, रतलाम को न्यायालय ने दोषी करार देते हुए 7 वर्ष तक के सश्रम कारावास और कुल ₹16,000 अर्थदंड की सजा सुनाई है। द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश रतलाम श्री आशीष श्रीवास्तव के न्यायालय द्वारा सत्र प्रकरण क्रमांक 55/2021 (अपराध क्रमांक 361/2020, थाना माणक चौक) में यह फैसला सुनाया गया। प्रकरण में शासन की ओर से अपर लोक अभियोजक संजीव सिंह चौहान ने प्रभावी पैरवी की। न्यायालय ने आरोपी जाकिर हुसैन को भारतीय दंड संहिता भादंसं की धारा 420, 467, 468, 471 एवं 120-बी के तहत दोषी पाया है, जिसमें सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
प्रधानमंत्री रोजगार गारंटी योजना के नाम पर रची गई थी साज़िश
मामले की अभियोजन कहानी के अनुसार आरोपी जाकिर हुसैन ने अपनी फरार पुत्री एवं सह-आरोपी ऐहतेशाम बानो के साथ मिलकर आपराधिक षड्यंत्र रचा। दोनों ने प्रधानमंत्री रोजगार गारंटी योजना के तहत दौना-पत्तल निर्माण इकाई लगाने के नाम पर जिला उद्योग केंद्र रतलाम के माध्यम से ऋण आवेदन प्रस्तुत किया था। बैंक प्रक्रिया के बाद सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया रेलवे कॉलोनी शाखा, रतलाम द्वारा ₹17 लाख का ऋण स्वीकृत किया गया। मशीनरी खरीदने के लिए "निक्की ट्रेडर्स, इंडस्ट्रियल एरिया, साँवेर रोड, इंदौर" के नाम से कोटेशन जमा किया गया था। ऋण की स्वीकृत राशि को मशीनरी खरीदने के बजाय इसी काल्पनिक फर्म 'निक्की ट्रेडर्स' के बैंक खाते में जमा करा दिया गया, जिसे जाकिर हुसैन खुद प्रोपराइटर बनकर संचालित कर रहा था।
इंदौर में जांच के दौरान खुली फर्जीवाड़े की पोल
आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ और पुलिस जांच के दौरान 15 जनवरी 2021 को जब जांच अधिकारी ने साँवेर रोड इंदौर स्थित बताए गए पते (ई-71, सेक्टर-सी-6) पर भौतिक सत्यापन किया, तो वहां 'निक्की ट्रेडर्स' नाम की कोई फर्म अस्तित्व में ही नहीं मिली। मौके पर दूसरी कंपनी का संचालन पाया गया, जिसके बाद सत्यापन पंचनामा तैयार किया गया। पुलिस ने आरोपी के पास से कूटरचित कोटेशन, चेक (क्रमांक 22301 से 22305) व अन्य फर्जी दस्तावेज जब्त किए। न्यायालय ने दस्तावेजी साक्ष्यों व बैंक अधिकारियों की गवाही का विश्लेषण करते हुए माना कि अभियोजन ने आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और आपराधिक षड्यंत्र के आरोपों को बिना किसी संदेह के प्रमाणित किया है।
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