भोपाल मारपीट मामला: धार्मिक उन्माद फैलाने वालों पर रासुका लगाने की मांग, अधिवक्ताओं ने राज्यपाल के नाम सौंपा ज्ञापन

Bhopal violence case: Advocates submit memorandum to Governor demanding imposition of NSA on those inciting religious frenzy

भोपाल मारपीट मामला: धार्मिक उन्माद फैलाने वालों पर रासुका लगाने की मांग, अधिवक्ताओं ने राज्यपाल के नाम सौंपा ज्ञापन

डेली जर्नल हिंदी डेस्क 

जबलपुर मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में विगत दिनों एक मुस्लिम युवक के साथ हुई कथित मारपीट, अपमानजनक व्यवहार और धार्मिक भावनाओं को आहत करने के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। इस घटना के विरोध में जबलपुर के अधिवक्ताओं ने गहरा आक्रोश व्यक्त करते हुए महामहिम राज्यपाल के नाम एक ज्ञापन अपर कलेक्टर ऋषभ जैन को सौंपा। अधिवक्ताओं ने मांग की है कि समाज में सांप्रदायिक वैमनस्य और धार्मिक उन्माद फैलाने वाले दोषी तत्वों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका - NSA) के तहत कड़ी कार्रवाई की जाए।

यह था पूरा मामला?

घटना 10 मई की बताई जा रही है, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आरोपों के मुताबिक, भोपाल में बजरंग दल के कुछ कार्यकर्ताओं ने एक होटल से मुस्लिम युवक को बाहर निकाला और उस पर "लव जिहाद" का आरोप लगाते हुए बेरहमी से मारपीट की। इतना ही नहीं, युवक के चेहरे पर कालिख और गोबर पोतकर उसे सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया। वायरल वीडियो में कथित तौर पर धर्म विशेष के खिलाफ अत्यंत आपत्तिजनक और भड़काऊ नारेबाजी भी की गई, जिससे मुस्लिम समुदाय की भावनाएं आहत हुई हैं।

"संविधान और सामाजिक समरसता पर हमला"

ज्ञापन सौंपने के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता मो. सलीम खान और शफी खान ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि भोपाल की घटना में जिस तरह इस्लाम और अल्लाह के प्रति अशोभनीय व भड़काऊ शब्दों का प्रयोग किया गया, वह देश के सामाजिक सौहार्द के लिए एक गंभीर खतरा है।

उन्होंने कहा कि "भारत एक लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है, जहां संविधान हर नागरिक को धार्मिक स्वतंत्रता देता है। किसी भी समुदाय या ईश्वर के खिलाफ अपमानजनक भाषा का प्रयोग सामाजिक शांति को भंग करने का सोची-समझी साजिश है। यह सिर्फ एक समुदाय का नहीं, बल्कि देश के भाईचारे और संविधान का अपमान है।"

सांप्रदायिक तनाव बढ़ने की आशंका, कठोर कार्रवाई की मांग

अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि ऐसे असामाजिक तत्वों पर समय रहते सख्त और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की गई, तो प्रदेश में सांप्रदायिक तनाव और बढ़ सकता है। देश-प्रदेश की एकता और अखंडता को बनाए रखने तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए दोषियों पर रासुका लगाना बेहद जरूरी है।

ज्ञापन के दौरान ये रहे उपस्थित

इस दौरान कानूनविदों और प्रबुद्ध जनों की भारी उपस्थिति रही, जिनमें प्रमुख रूप से अधिवक्ता मो. सलीम खान, मुईन खान, अदनान अंसारी, जानी खान, शफी खान, शाहिद अली, शाहजाद खान, अख्तर अली, मो. इमरान, एम.एच. चौधरी, सलामुद्दीन मंसूरी, आबिद मंसूरी, ए.के. अशरफी, मकसूद नबी और सोहिब खान सहित कई अन्य अधिवक्ता शामिल थे।

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