शिक्षकों के समर्थन में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र, विशेष सत्र बुलाकर प्रस्ताव पास करने की मांग

Leader of the Opposition Umang Singhar wrote a letter to the Chief Minister in support of the teachers, demanding a special session and passing of the resolution

शिक्षकों के समर्थन में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र, विशेष सत्र बुलाकर प्रस्ताव पास करने की मांग

डेली जर्नल हिंदी 

रतलाम, प्रदेश के लगभग डेढ़ लाख प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षकों की नौकरी पर संकट गहराने को लेकर कांग्रेस ने राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। रतलाम कांग्रेस मीडिया प्रवक्ता रश्मि सिंह ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में भाजपा की मोहन यादव सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि सरकार राष्ट्रनिर्माता शिक्षकों का लगातार अपमान कर रही है। कर्मचारी चयन मंडल द्वारा वर्ष 2011 से पहले सेवा में आए शिक्षकों के लिए पुनः पात्रता परीक्षा अनिवार्य किए जाने और इसमें असफल होने पर अनिवार्य सेवानिवृत्ति के प्रावधान को उन्होंने तानाशाही की पराकाष्ठा करार दिया है। इस फैसले से पूरे मध्य प्रदेश के शिक्षक समुदाय में भारी आक्रोश और भय व्याप्त है।

15 से 25 वर्षों के शैक्षणिक अनुभव वाले शिक्षकों पर परीक्षा थोपना असंवैधानिक

विज्ञप्ति के अनुसार, जो शिक्षक तत्कालीन भर्ती नियमों का पालन करते हुए वर्ष 2005 और 2008 में पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण कर मेरिट के आधार पर शासकीय सेवा में आए हैं, उनके पास 15 से 25 वर्षों का लंबा शैक्षणिक अनुभव है। रश्मि सिंह ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश की आड़ लेकर सेवारत शिक्षकों से दोबारा परीक्षा लेना असंवैधानिक है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में शिक्षकों के 1 लाख से अधिक पद रिक्त पड़े हैं, लेकिन सरकार नई भर्तियां करने के बजाय सेवारत शिक्षकों की नौकरी छीनने का प्रयास कर रही है।

तमिलनाडु की तर्ज़ पर विशेष सत्र बुलाने की मांग, मांगें पूरी न होने पर आंदोलन की चेतावनी

रश्मि सिंह ने जानकारी दी कि विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस विषय में मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखा है। पत्र में मांग की गई है कि सरकार तमिलनाडु सरकार की तर्ज़ पर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर शिक्षकों के समर्थन में प्रस्ताव पारित करे और उसे केंद्र सरकार को भेजे ताकि सेवारत शिक्षकों को इस परीक्षा से मुक्त रखा जा सके। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस कर्मचारी-विरोधी निर्णय को निरस्त नहीं किया, तो कांग्रेस पार्टी पूरे मध्य प्रदेश में सड़कों पर उतरकर व्यापक आंदोलन करेगी।