लाडली बहना योजना: हाईकोर्ट से पारस सकलेचा की याचिका खारिज, कोर्ट ने कहा- 'योजना का क्रियान्वयन शासन का अधिकार'
Ladli Behna Yojana: High Court dismisses Paras Saklecha's petition, says 'implementation of the scheme is the government's right'
डेली जर्नल हिंदी डेस्क
इंदौर, लाडली बहना योजना में नए पंजीयन शुरू करने और पात्रता की उम्र घटाने को लेकर पूर्व विधायक पारस सकलेचा द्वारा दायर की गई जनहित याचिका को इंदौर हाईकोर्ट ने बर्खास्त कर दिया है। माननीय न्यायाधीश विजय कुमार शुक्ला और न्यायाधीश आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि इस पिटीशन पर सुनवाई का कोई न्यायोचित कारण नहीं है, क्योंकि यह शासन का वैधानिक मामला है और इसमें न्यायालय का हस्तक्षेप उचित नहीं है।
समानता के अधिकार की दलील नहीं आई काम सकलेचा की ओर से वरिष्ठ अभिभाषक विभोर खंडेलवाल ने तर्क दिया था कि 20 अगस्त 2023 के बाद 21 वर्ष की आयु पूरी करने वाली महिलाओं को लाभ न देना संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता के अधिकार) का उल्लंघन है। उन्होंने मांग की थी कि योजना में पंजीकरण की प्रक्रिया सतत चालू रहनी चाहिए और न्यूनतम आयु सीमा 21 से घटाकर 18 वर्ष की जानी चाहिए। साथ ही, मासिक सहायता राशि को बढ़ाकर ₹3000 करने की भी अपील की गई थी।
सरकार का पक्ष: न्यायालय का हस्तक्षेप का विषय नहीं शासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता सुदीप भार्गव और प्रद्युम्न कीबे ने इन मांगों का कड़ा विरोध किया। उन्होंने दलील दी कि किसी भी सरकारी योजना को लागू करना और उसकी शर्तें तय करना सरकार का विशेषाधिकार है। हाईकोर्ट ने शासन के पक्ष को स्वीकार करते हुए याचिका को खारिज कर दिया। वहीं, पारस सकलेचा ने इस निर्णय पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि वे हाईकोर्ट के इस फैसले के विरुद्ध अब सुप्रीम कोर्ट (माननीय उच्चतम न्यायालय) का दरवाजा खटखटाएंगे।