सीमित संसाधन, अटूट मेहनत: साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर मध्य प्रदेश पुलिस में चमके रतलाम में पदस्थ तीन अफसर, पढ़िए पदोन्नत हुए तीन टीआई के संघर्ष की कहानी

Limited resources, unwavering hard work: Three officers from humble backgrounds have risen to prominence in the Madhya Pradesh Police, posted in Ratlam. Read the story of the struggles of these three promoted TIs

सीमित संसाधन, अटूट मेहनत: साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर मध्य प्रदेश पुलिस में चमके रतलाम में पदस्थ तीन अफसर, पढ़िए पदोन्नत हुए तीन टीआई के संघर्ष की कहानी

डेली जर्नल हिंदी डेस्क 

भोपाल/रतलाम, मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय, भोपाल द्वारा सब-इंस्पेक्टर से इंस्पेक्टर (टीआई - TI) के पद पर पदोन्नति की संशोधित एवं नई सूची जारी की गई है। इस आदेश के तहत भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और उज्जैन सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों में पदस्थ पुलिस अधिकारियों को पदोन्नति दी गई है। पुलिस मुख्यालय द्वारा पूर्व में कुल 1029 कर्मियों की पदोन्नति प्रक्रिया शुरू की गई थी, जिसके तहत हाल ही में सितंबर 2026 की समीक्षा के बाद 223 अधिकारियों एवं कर्मचारियों की नई पदस्थापना सूची जारी की गई। जारी सूची में रतलाम जिले से भी तीन सब-इंस्पेक्टरों—मुकेश सस्तिया, विजय सिंह बामनिया और कन्हैया अवासीया को प्रमोट कर इंस्पेक्टर बनाया गया है। रतलाम एसपी अमित कुमार ने तीनों इंस्पेक्टर के कंधे पर सितारे लगाते हुए उन्हें सम्मानित किया। 

आर्मी के जुनून से सब-इंस्पेक्टर और अब टीआई तक का सफर, साधारण किसान परिवार से निकलकर हासिल की सफलता

मूल रूप से सीहोर जिले की इछावर तहसील के गांव अलीपुर के रहने वाले मुकेश सस्तिया एक साधारण किसान परिवार से आते हैं। चार भाइयों में सबसे छोटे मुकेश सस्तिया के मन में बचपन से ही वर्दी के प्रति गहरा आकर्षण था। इसी जुनून के चलते उन्होंने शुरुआत में सेना (आर्मी) की भर्ती में भी भाग लिया था। इसके बाद उन्होंने हार न मानते हुए 2014 में अपने दूसरे प्रयास में मध्य प्रदेश पुलिस में सब-इंस्पेक्टर के पद पर सफलता हासिल की। इंदौर के RAPTC ट्रेनिंग सेंटर और पीटीसी भौरी भोपाल में बुनियादी प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उनकी पहली पोस्टिंग रतलाम जिले में हुई।

रतलाम में कई महत्वपूर्ण थानों और चौकियों की संभाली कमान

परिवीक्षा अवधि के दौरान उन्होंने सैलाना, जावरा सिटी और आलोट में अपनी सेवाएं दीं। इसके बाद वे रतलाम के थाना डीडी नगर, चौकी सालाखेड़ी, थाना स्टेशन रोड, चौकी हाट रोड और चौकी बिरमावल (थाना बिलपांक) में पदस्थ रहे। मुकेश सस्तिया का मानना है कि वर्दी पुलिस अधिकारी को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचकर हर पीड़ित की मदद करने का सबसे उत्तम अवसर प्रदान करती है। इसी सेवा भावना के साथ अब वे टीआई के रूप में अपनी नई जिम्मेदारियों का निर्वहन करेंगे।

विजय सिंह बामनिया: संघर्ष और पहले ही प्रयास में सफलता की प्रेरणादायक कहानी, सीमित संसाधनों के बीच पाई उच्च शिक्षा

धार जिले की दही तहसील के गांव अमलाल के रहने वाले विजय सिंह बामनिया एक साधारण कृषक परिवार से आते हैं। शासकीय विद्यालय से कक्षा 1 से 12वीं तक की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने पीजी कॉलेज धार से बी.एससी. (बायोलॉजी) की डिग्री हासिल की। माता-पिता के त्याग और मार्गदर्शन के बल पर वे प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए इंदौर पहुंचे। वहां कड़ी मेहनत के दम पर साल 2015 में अपने पहले ही प्रयास में उनका चयन सब-इंस्पेक्टर के पद पर हो गया था।

निरंतर जनसेवा का मिला प्रतिफल

वर्ष 2015 से लगातार पुलिस सेवा में कार्यरत विजय सिंह बामनिया ने रतलाम जिले के स्टेशन रोड, सालाखेड़ी चौकी, रावटी, आलोट, आईए जावरा, सरसी चौकी और बिरमावल चौकी में अपनी सेवाएं दीं। सालाखेड़ी चौकी में पदस्थापना के दौरान ही उन्हें यह पदोन्नति मिली है। उनका कहना है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, यदि लक्ष्य साफ हो और मेहनत में कोई कसर नहीं छोड़ी जाए, तो सफलता जारी हासिल होती है।

निष्ठा और कर्तव्यपरायणता से पाया पदोन्नति का मुकाम

रतलाम जिले में पदोन्नत होने वाले तीसरे अधिकारी कन्हैया अवासीया ने भी अपनी निष्ठा और उत्कृष्ट कार्यशैली के बल पर यह मुकाम हासिल किया है। अवासीया ने पुलिस सेवा में रहते हुए हमेशा कानून-व्यवस्था बनाए रखने और जनता से सीधा संवाद स्थापित करने पर जोर दिया है।

जनता की सुरक्षा और अपराध नियंत्रण पहली प्राथमिकता

अवासीया की कई थानों और क्षेत्रों में तैनाती के दौरान अपराधियों पर नकेल कसने और पीड़ितों को त्वरित न्याय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका रही है। सब-इंस्पेक्टर से इंस्पेक्टर के पद पर हुई यह पदोन्नति उनके वर्षों के कठिन परिश्रम, विभागीय निष्ठा और अनुशासित सेवा का परिणाम है। टीआई बनने के बाद वे अब और अधिक प्रशासनिक दक्षता के साथ अपने कर्तव्यों का पालन करेंगे।