चालान पेश हुआ या सिर्फ कागजों का खेल? बिना चालान के रतलाम पुलिस ने करवा दी आरोपियों की जमानत, रिंगनोद थाने के एनडीपीएस मामले में उलझी पुलिस की थ्योरी, रतलाम पुलिस सोशल मीडिया पर फिर हुई ट्रोल

Was the challan presented or was it just a paperwork? Ratlam police secured bail for the accused without a challan. The police theory in the Ringnod police station's NDPS case is muddled,

चालान पेश हुआ या सिर्फ कागजों का खेल? बिना चालान के रतलाम पुलिस ने करवा दी आरोपियों की जमानत, रिंगनोद थाने के एनडीपीएस मामले में उलझी पुलिस की थ्योरी, रतलाम पुलिस सोशल मीडिया पर फिर हुई ट्रोल

डेली जर्नल हिंदी डेस्क 

रतलाम, रतलाम के जावरा अंतर्गत रिंगनोद थाने के एनडीपीएस एक्ट के एक ही अपराध (क्र. 187/2026) में हाईकोर्ट के दो अलग-अलग आदेशों ने रतलाम पुलिस की कार्यप्रणाली और जांच पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बीती 17 अगस्त 2026 को आए इंदौर हाईकोर्ट के आदेश में चार आरोपी सुधीर बाबा, सोना उर्फ संगीता, बिलाल खान और नरेंद्र सिंह को इस आधार पर जमानत मिल गई थी कि न्यायालय के समक्ष “Charge Sheet has been filed” (चालान पेश हो चुका है) बताया गया था। लेकिन इसी अपराध से जुड़े पांचवें आरोपी असीम खान की जमानत याचिका पर 3 सितंबर 2026 को आए आदेश में अदालत ने चार्जशीट दाखिल होने के बाद दोबारा आवेदन लगाने की स्वतंत्रता दी। इस विरोधाभास ने यह बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर 17 अगस्त को चालान वास्तव में पेश हुआ था या यह सिर्फ कागजों तक सीमित था, और यदि चालान पेश नहीं हुआ था तो कोर्ट के समक्ष किस आधार पर यह तथ्य रखा गया? इससे तो साफ साफ जाहिर होता है कि कोर्ट को गुमराह किया गया है। नतीजतन जिम्मेदार अधिकारी को हर्जाना भी भुगतना पड़ सकता है। 

रतलाम सोशल मीडिया X पर फिर हुई ट्रॉल

यह पूरा मामला तब और गर्मा गया जब बीती 17 अगस्त 2026 और 3 सितंबर 2026 के दोनों हाईकोर्ट आदेश सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर तेजी से वायरल होने लगे, जिससे पुलिस की भूमिका पर सार्वजनिक चर्चाएं शुरू हो गईं। जब इस संबंध में एसडीओपी जावरा संदीप मालवीय से पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो उन्होंने पुलिस द्वारा जमानत के विरोध और आगे कानूनी कार्रवाई की बात कही, लेकिन बाद के कॉल्स का कोई उत्तर नहीं दिया। वहीं, एसपी रतलाम ने हाईकोर्ट का मामला होने के कारण इस पर विस्तृत टिप्पणी से बचते हुए जमानत के खिलाफ अपील की बात कही और पूरी जानकारी के लिए एसडीओपी से संपर्क करने को कहा। बहरहाल, चार्जशीट की वास्तविक दाखिला तारीख क्या है और पुलिस की इस कथित लापरवाही के क्या परिणाम होंगे, इन सवालों के जवाब अब पुलिस रिकॉर्ड और न्यायालयीन दस्तावेजों पर टिके हैं। वहीं अब सवाल यह भी यह क्या इस मामले में कहीं मिलभगत तो नहीं। 

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