मानसून से पहले खुली पोल: मिल्लत नगर में चेंबर जाम, कलेक्टर के सांध्यकालीन शिविर दावों तक सीमित
Before the monsoon, the truth is revealed: Millat Nagar's chamber is jammed, and the Collector's evening camp is limited to claims
डेली जर्नल हिंदी डेस्क
रतलाम। मानसून की दस्तक सिर पर है, लेकिन नगर निगम के जिम्मेदारों की घोर लापरवाही के कारण शहर में जलभराव का खतरा मंडराने लगा है। इसकी बानगी शहर के वार्ड क्रमांक 37, मिल्लत नगर में साफ देखी जा सकती है, जहां सीवरेज लाइन डालने के बाद उसकी सफाई न होने से चेंबर पूरी तरह जाम पड़े हैं और गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है। स्थानीय रहवासियों का पैदल निकलना तक दुश्वार हो चुका है और पिछले 10 दिनों से लगातार शिकायत करने के बावजूद नगर निगम प्रशासन कुंभकर्णी नींद सोया हुआ है। आलम यह है कि जब आला अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद सोमवार दोपहर को सीवरेज सक्शन मशीन मौके पर पहुंची भी, तो अमला बिना कोई सफाई कार्य किए केवल मुआयना करके वापस लौट गया, जिससे स्वच्छ भारत मिशन के दावों की खुलेआम धज्जियां उड़ रही हैं।
केवल मुआयना कर लौटी सक्शन मशीन, पार्षद ने जताई बेबसी
वार्डवासियों की इस गंभीर समस्या पर स्थानीय पार्षद वसीम अली शेरानी ने भी बेबसी जाहिर करते हुए कहा कि उन्होंने कई बार निगम के जिम्मेदार अधिकारियों को सफाई के लिए कहा, लेकिन कोई भी वार्ड में काम करने को तैयार नहीं है। चेंबर इतने भर चुके हैं कि गंदा पानी ओवरफ्लो होकर मुख्य रास्तों पर जमा तो हो ही रहा है, घरों में भी जमा हो रहा है, जिससे गंदगी बदबू फैल रही है। बीमारियों के बढ़ने की संभावना अधिक बढ़ गई है। सोमवार को जब सक्शन मशीन सिर्फ औपचारिकता निभाकर लौट गई, तो रहवासियों का गुस्सा और बढ़ गया। यदि पहली ही तेज बारिश होती है, तो इस पूरे इलाके के घरों में सीवरेज का गंदा पानी घुसना तय है, जिससे महामारी फैलने का अंदेशा भी बढ़ गया है।
कागजी साबित हो रहे कलेक्टर मिशा सिंह के 'सांध्यकालीन शिविर'
दूसरी ओर, कलेक्टर मिशा सिंह द्वारा जनसमस्याओं के तत्काल निराकरण के लिए शुरू किए गए 'सांध्यकालीन शिविर' अब रतलाम में महज एक रस्म अदायगी बनकर रह गए हैं। धरातल पर जनता बुनियादी सुविधाओं के लिए त्रस्त है, जबकि अखबारों और मीडिया में समस्याओं के हल होने के बड़े-बड़े दावे परोसे जा रहे हैं। जमीनी हकीकत यह है कि कई वार्डों के नागरिकों को तो यह भी नहीं पता कि ये शिविर कब और कहाँ लग रहे हैं और न ही प्रशासन द्वारा कोई हेल्पलाइन नंबर जारी किया गया है। निगम के स्वास्थ्य और सफाई प्रभारी अधिकारियों की यह नाकामी अब सीधे तौर पर आम जनता के लिए आफत बनने जा रही है।
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