दिवाली पर आतिशबाजी से जलने या आंख में चोट लगने पर भूलकर भी न करें ये गलतियां पटाखों से जली त्वचा पर न लगाएं टूथपेस्ट या घी, 15-20 मिनट डालें ठंडा पानी: CMHO

Avoid these mistakes if you suffer burns or eye injuries from fireworks on Diwali. Do not apply toothpaste or ghee on the skin burnt by firecrackers. Pour cold water for 15-20 minutes: CMHO

दिवाली पर आतिशबाजी से जलने या आंख में चोट लगने पर भूलकर भी न करें ये गलतियां     पटाखों से जली त्वचा पर न लगाएं टूथपेस्ट या घी, 15-20 मिनट डालें ठंडा पानी: CMHO

डेली जर्नल हिंदी डेस्क 

रतलाम, दीपावली पर्व के दौरान आतिशबाजी और असुरक्षित पटाखों के उपयोग से त्वचा के जलने और आंखों में गंभीर चोट का जोखिम बढ़ जाता है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. किरण वाडिवा ने बताया कि सही समय पर प्राथमिक उपचार और सावधानियां अपनाकर स्थाई क्षति से बचा जा सकता है। त्वचा जलने पर प्रभावित हिस्से पर तुरंत 15 से 20 मिनट तक निरंतर साफ व ठंडा पानी डालें और घाव को सूखे कपड़े से ढककर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। जलने पर टूथपेस्ट, घी, बर्फ, रुई या घरेलू नुस्खे न लगाएं और न ही छाले फोड़ें, क्योंकि इनसे संक्रमण का खतरा बढ़ता है।

आंखों की सुरक्षा के लिए बरतें विशेष सावधानी

पटाखे जलाते या देखते समय सुरक्षा चश्मे (प्रोटेक्टिव गॉगल्स) का उपयोग करें और पटाखों से कम से कम 5 से 10 मीटर की सुरक्षित दूरी बनाए रखें। यदि पटाखे की चिंगारी, कण या रसायन आंख में चला जाए, तो आंखों को बिल्कुल भी न मलें और न ही दबाएं, क्योंकि इससे कॉर्निया को नुकसान पहुंच सकता है। प्राथमिक उपचार के तौर पर आंख को 10 से 20 मिनट साफ पानी या सलाइन से धोएं, साफ पट्टी से ढकें और बिना डॉक्टर की सलाह के कोई आई ड्रॉप न डालें। यदि आंख में तेज दर्द, लालिमा, सूजन, धुंधलापन या पानी आने की समस्या हो, तो तुरंत नेत्र विशेषज्ञ के पास जाएं।

बच्चों की निगरानी और सतर्कता पर जोर

स्वास्थ्य विभाग ने ताकीद की है कि बच्चों को कभी भी बिना निगरानी के पटाखे न जलाने दें। पटाखे जलाने के लिए हमेशा लंबी अगरबत्ती या लाइटर स्टिक का उपयोग करें और तेज हवा या भीड़भाड़ वाली जगहों पर आतिशबाजी से बचें। साथ ही, अस्वीकृत, अत्यधिक विस्फोटक या हाथ से बने पटाखों का प्रयोग पूरी तरह वर्जित रखें। डॉ. वाडिवा ने कहा कि एक छोटी सी सावधानी आपकी आंखों को गंभीर चोट या स्थाई दृष्टि हानि से बचा सकती है, इसलिए किसी भी समस्या को हल्के में न लें और समय पर चिकित्सकीय परामर्श अवश्य लें।

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