काली क्रेटा, ढाबे पर डील और खाकी का संरक्षण: क्या नामली कांड में केवल सिपाहियों तक सीमित रहेगी कार्रवाई? जांच से बाहर अफसर पर उठे सवाल... 

A black Creta, a deal at a dhaba, and the protection of the police: will the Namli incident be limited to just the constables? Questions have been raised about the officer excluded from the investigation

काली क्रेटा, ढाबे पर डील और खाकी का संरक्षण: क्या नामली कांड में केवल सिपाहियों तक सीमित रहेगी कार्रवाई? जांच से बाहर अफसर पर उठे सवाल... 

डेली जर्नल हिंदी डेस्क 

रतलाम जिले के नामली थाना क्षेत्र में बीते दिनों हुई एक बड़ी कार्रवाई के बाद अब पुलिस महकमे की कार्रवाई सोशल मीडिया ग्रुप्स और राजनीतिक-प्रशासनिक गलियारों में चर्चाओं से भरे पड़े है कि नामली क्षेत्र के एक ढाबे पर मध्य प्रदेश व राजस्थान बॉर्डर पार कर काली क्रेटा कार क्रमांक MP 14..... से पहुंचे नशे के बड़े सौदागरों के साथ कानून  के रखवालों ने एक डील कर डाली। सूत्रों के मुताबिक, नशे के इन सौदागरों का सौदा ढाबे पर तय हो रहा था, तभी मौके पर महकमे के दो लाइन अटैच पुलिसकर्मी पहुंच गए। इसके बाद बिना किसी कानूनी कार्रवाई के एक मोटा सौदा अंजाम दिया गया और सौदागरों को सुरक्षित मंदसौर जिले के सीतामऊ-सरोजिनी ग्राम की ओर रवाना कर दिया गया।

सस्पेंशन की जगह सिर्फ 'लाइन अटैचमेंट' की खानापूर्ति 

इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आ रही है कि जिस बड़े कांड में सीधे तौर पर निलंबन (सस्पेंशन) और आपराधिक धाराओं में कार्रवाई होनी चाहिए थी, उसमें जिम्मेदारों द्वारा दोनों पुलिसकर्मियों को केवल 'लाइन अटैच' और जांच का हवाला देकर केवल रस्म अदायगी कर दी गई। सूत्रों का दावा है कि पूरा घटनाक्रम और इसकी अंदरूनी परतें उच्चाधिकारियों व जिम्मेदारों की जानकारी में आ चुकी हैं, लेकिन इसके बावजूद कठोर दंडात्मक कदम उठाने के बजाय आरोपियों के बचाव में लामबंदी देखने को मिल रही है। ऐसे में अब आमजन और पुलिस महकमे में ही यह सवाल उठने लगा है कि क्या इस पूरे 'खेल' में केवल यही दो सिपाही शामिल थे या फिर संरक्षण देने वाले जिम्मेदारों के हाथ भी इस सौदेबाजी से रंगे हुए हैं?

आखिर किसके 'खास' हैं ? उठ रहे कई तीखे सवाल 

सूत्रों और तमाम मीडिया में खबरों के अनुसार शक की निगाहे तो ग्रामीण एसडीओपी पर भी घूमी है। लेकिन लाइन अटैच और जांच की कार्रवाई के घेरे में के अल इन दो पुलिसकर्मियों को लाया गया। या यूं कहे कि चर्चाओं में जिम्मेदार पुलिस अधिकारी का नाम आने के बावजूद महोदय पर अंगुली तक नहीं उठी। आखिर किसके खास है , किसका मिला रहा संरक्षण? मामला सामने आने के बाद अब पुलिस की कार्यप्रणाली और आला अफसरों की नीयत पर तीखे सवाल खड़े हो रहे हैं। फिलहाल, इस 'डील' की गूंज पूरे जिले में चर्चा का विषय बनी हुई है और हर किसी की नजरें जिम्मेदारों के अगले कदम पर टिकी हैं। एसपी कुमार के अनुसार जांच शुरू हो चुकी है। लेकिन चर्चाओं में पुलिस अधिकारी जांच से बाहर क्यों? आखिर जांच कब तक? या सख्त कार्रवाई होगी या फिर जांच को दबा दिया जाएगा।

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