नाकेबंदी, भारी आक्रोश और 30 घंटे का लंबा इंतजार: आश्वासन के बाद थमा जीवन सिंह शेरपुर का आंदोलन, आमजन ने ली राहत की सांस
Blockade, massive outrage, and a 30-hour wait: Jeevan Singh Sherpur's protest ends after assurances, public breathes a sigh of relief
डेली जर्नल हिंदी डेस्क
रतलाम जिले के जावरा में जनहित के 11 गंभीर मुद्दों को लेकर शुरू हुआ करणी सेना परिवार का आंदोलन अब प्रशासन के कथित अड़ियल और तानाशाही रवैये के चलते करीब 30 घंटे चला। करणी सेना परिवार के प्रमुख जीवन सिंह शेरपुर पिछले 30 घंटों से भी अधिक समय से अपने सैकड़ों समर्थकों और पीड़ितों के साथ महू-नीमच फोरलेन पर धरने पर डटे रहे थे। बढ़ती हुई गर्मी और खुले आसमान के नीचे आंदोलनकारी तंबू लगाकर रात भर जमे रहे। 11 सूत्रीय मांगों के निराकरण का आश्वासन मिलने और 14 साल की नाबालिग की तलाश किए जाने के बाद जीवनसिंह शेरपुर ने धरना खत्म करने की घोषणा की। मौके पर मौजूद एडिशनल एसपी, एडीएम डॉक्टर शालिनी श्रीवास्तव, एसडीएम आर्ची हरित की समझाइश और आश्वासन के बाद आंदोलनकारियों ने अपनी 11 सूत्रीय मांगों के साथ ज्ञापन सौंपा।
प्रशासन की नाकेबंदी और वार्ता रही विफल, आम जनता होती रही परेशान
आंदोलनकारियों का आरोप था कि पुलिस और जिला प्रशासन ने उन्हें अपनी जायज़ मांगें लेकर कलेक्टर कार्यालय जाने से बलपूर्वक रोक दिया था। इतना ही नहीं, रतलाम पहुंचने वाले हर मार्ग पर भारी बैरिकेडिंग कर ब्लॉक कर दिया गया था। पूरे महू रोड से कलेक्टर कार्यालय तक जगह जगह ब्रिगेटिंग की गई जिससे आमजन को आने-जाने में काफी हद तक समस्या देखनी पड़ी। प्रशासन ने आम जान की समस्या तक को नजरअंदाज कर 30 घंटे निकाल दिए और आमजन परेशान होते रहे। जीवन सिंह शेरपुर ने स्पष्ट किया है कि वे जिला कलेक्टर मिशा सिंह से ही मिलकर चर्चा करना चाहते हैं। हालांकि, मंगलवार को एडीएम (ADM) मौके पर पहुँची थीं, लेकिन उनके साथ हुई वार्ता विफल रही क्योंकि प्रदर्शनकारी केवल कलेक्टर से ही बात करने की मांग पर अड़े रहे थे।
कलेक्टर के रवैये पर भारी आक्रोश
24 घंटे से ज्यादा समय बीत जाने के बावजूद जिला कलेक्टर का मौके पर न पहुंचना और न ही किसी सक्षम अधिकारी को वार्ता के लिए भेजना, आंदोलनकारियों में भारी आक्रोश पैदा कर रहा था। इसे जिला प्रशासन की संवेदनहीनता और तानाशाही बताया जाने लगा था। शेरपुर ने चेतावनी दी कि जब तक कलेक्टर खुद आकर उनकी मांगें नहीं सुनतीं और ठोस कार्यवाही का आश्वासन नहीं देतीं, वे धरने से नहीं उठेंगे। इस अड़ियल रवैये के खिलाफ आंदोलन जनआक्रोश का रूप ले चुका था।
यातायात प्रभावित और जनजीवन अस्त-व्यस्त
फोरलेन पर चल रहे धरने के कारण यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ, जिससे आम यात्रियों और मालवाहकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा। प्रशासन की ओर से कोई ठोस पहल न किए जाने से स्थिति और जटिल होती जा रही थी। धरना स्थल पर ही समर्थकों के लिए भोजन की व्यवस्था की गई, जहां जीवन सिंह शेरपुर ने स्वयं अपने हाथों से पूरियां बनाकर साथियों को खिलाईं।
प्रशासन पर वसूली और भ्रष्टाचार के लगे गंभीर आरोप
धरना स्थल से जीवन सिंह शेरपुर ने पुलिस और खनिज विभाग पर भ्रष्टाचार के बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस पर शराब ठेकेदारों और बाछड़ा समुदाय से 'बंदी' याने अवैध वसूली लेने के आरोप लग रहे हैं, जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। इसके अलावा, उन्होंने खनिज विभाग द्वारा आयुष शर्मा पर की गई कार्यवाही को मनमानी और दबावपूर्ण बताते हुए उसे गलत ठहराया है।
ये हैं वो 11 प्रमुख जनहित मुद्दे, जिन पर अड़ा है करणी सेना परिवार:
खनिज विभाग की मनमानी: अवैध उत्खनन के नाम पर खाली डंपरों पर दर्ज फर्जी प्रकरणों की निष्पक्ष जाँच और दोषियों पर कार्यवाही।
अवैध देह व्यापार पर रोक: ग्राम पिपलिया जोधा में अवैध देह व्यापार बंद कर मारपीट के आरोपियों पर सख्त कार्यवाही।
नाबालिग की तलाश: ग्राम नेगरून की दो माह से लापता नाबालिग बालिका की तत्काल खोज और दोषियों को सज़ा।
बढ़ती चोरियाँ और वसूली: जिले में बढ़ती चोरी की घटनाओं पर रोक और अवैध वसूली करने वालों पर शिकंजा।
ईंट भट्टा स्थानांतरण: ग्राम बोरवनी में रिहायशी इलाके से ईंट भट्टे को हटाकर अन्यत्र स्थानांतरित करना।
अम्बिका सिटी में सुविधाएँ: जावरा की अम्बिका सिटी कॉलोनी में मूलभूत सुविधाएँ उपलब्ध कराना और कॉलोनाइजर पर कार्यवाही।
स्थायी पट्टा: कई गाँवों में वर्षों से रह रहे परिवारों को हटाने के बजाय स्थायी पट्टा देना।
किसानों को राहत: किसानों के कर्ज जमा करने की अंतिम तिथि 28 मार्च से बढ़ाकर 15 मई करना।
गेहूँ खरीदी पंजीयन: सर्वर समस्या दूर कर गेहूँ खरीदी पंजीयन की तारीख बढ़ाना।
भूमिहीनों को हक: नगरपालिका जावरा द्वारा 2017 से लंबित भूमिहीनों को ₹10,000 के बदले पट्टा देना।
अवैध गतिविधियाँ: क्षेत्र में चल रही अन्य सभी अवैध गतिविधियों पर तत्काल और सख्त कार्यवाही।