जावरा की पूर्व सीएमओ और लिपिक को भ्रष्टाचार में 4-4 साल की जेल, रतलाम कोर्ट का कड़ा फैसल

Former Jaora CMO and clerk sentenced to four years in prison for corruption; Ratlam court's harsh verdict

जावरा की पूर्व सीएमओ और लिपिक को भ्रष्टाचार में 4-4 साल की जेल, रतलाम कोर्ट का कड़ा फैसल

डेली जर्नल हिंदी डेस्क

रतलाम की विशेष अदालत ने जावरा नगरपालिका की पूर्व मुख्य नगरपालिका अधिकारी सीएमओ नीता जैन और तत्कालीन लिपिक विजय सिंह शक्तावत को भ्रष्टाचार के एक गंभीर मामले में दोषी पाया है। विशेष न्यायाधीश संजीव कटारे ने दोनों आरोपियों को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत चार-चार वर्ष के सश्रम कारावास और दो-दो हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। इस ऐतिहासिक फैसले के तुरंत बाद दोनों दोषियों को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया। यह मामला जावरा में प्रशासनिक शुचिता और पारदर्शिता की दिशा में एक बड़ा उदाहरण माना जा रहा है।

वॉयस रिकॉर्डर अदालत में बनी अहम साक्ष्य

यह पूरा घटनाक्रम 12 मार्च 2021 का है, जब उज्जैन लोकायुक्त की टीम ने एक सुनियोजित कार्रवाई करते हुए सीएमओ कार्यालय में दबिश दी थी। जावरा निवासी ठेकेदार पवन भावसार ने शिकायत दर्ज कराई थी कि वार्ड 14, 18 और 20 में किए गए निर्माण कार्यों के बिल भुगतान और एफडीआर रिलीज करने के बदले तत्कालीन सीएमओ नीता जैन पर्सनल कमीशन की मांग कर रही थीं। लोकायुक्त पुलिस ने भ्रष्टाचार की पुष्टि के लिए ठेकेदार को वॉइस रिकॉर्डर दिया था, जिसमें सीएमओ और लिपिक द्वारा रिश्वत के लिए मोलभाव करने की बात रिकॉर्ड हो गई, जो अदालत में सबसे अहम साक्ष्य बनी।

सीएमओ और लिपिक को रिश्वत की राशि के साथ रंगे हाथ पकड़ा

अभियोजन पक्ष के अनुसार, सीएमओ ने लिपिक विजय सिंह के माध्यम से कुल रिश्वत की राशि 20 हजार रुपये तय की थी। ट्रैप के दिन, जैसे ही ठेकेदार ने रिश्वत की पहली किश्त लिपिक को सौंपी और लिपिक वह राशि लेकर सीएमओ के कक्ष में पहुँचा, लोकायुक्त की टीम ने दोनों को रंगे हाथों धर दबोचा। अदालत में विशेष लोक अभियोजक ने दलील दी कि सरकारी पदों पर बैठे अधिकारियों द्वारा इस तरह का कमीशन सिस्टम न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि यह सार्वजनिक निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को भी बुरी तरह प्रभावित करता है।

पर्सनल कमीशन सिस्टम ने खोली पोल

इस फैसले ने नगरपालिकाओं में प्रचलित कथित पर्सनल कमीशन सिस्टम' की पोल खोल दी है। ठेकेदारों का मानना है कि कमीशन और टैक्स के बोझ के कारण विकास कार्यों के लिए बहुत कम बजट बचता है, जिससे निर्माण की गुणवत्ता गिरती है। रतलाम अदालत के इस निर्णय से भ्रष्ट अधिकारियों के बीच हड़कंप मच गया है। यह फैसला स्पष्ट संदेश देता है कि भ्रष्टाचार के विरुद्ध साक्ष्यों के साथ की गई शिकायत न केवल दोषियों को जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा सकती है, बल्कि व्यवस्था में सुधार का मार्ग भी प्रशस्त करती है।