RBI नियमों को ठेंगा दिखा रही प्राइवेट फाइनेंस कंपनियां? आदित्य बिरला कैपिटल पर रतलाम के उद्यमियों ने लगाए अवैध वसूली के आरोप
Are private finance companies flouting RBI regulations? Ratlam entrepreneurs accuse Aditya Birla Capital of illegal extortion
डेली जर्नल हिंदी डेस्क
रतलाम, एक ओर सरकार सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) को देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानकर उन्हें बढ़ावा देने के बड़े-बड़े वादे कर रही है, वहीं दूसरी ओर निजी फाइनेंस कंपनियां इन छोटे उद्यमियों के लिए सिरदर्द साबित हो रही हैं। ताजा मामला 'आदित्य बिरला कैपिटल' से जुड़ा है, जहाँ रतलाम के कई MSME पंजीकृत उद्यमियों ने कंपनी पर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियमों का उल्लंघन कर अवैध वसूली और मानसिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए हैं।
4% फोरक्लोजर चार्ज: नियमों के विपरीत वसूली का खेल
पीड़ित उद्यमियों का आरोप है कि आदित्य बिरला कैपिटल द्वारा लोन बंद करने (Foreclosure) के नाम पर 4 प्रतिशत तक का भारी-भरकम शुल्क और अन्य अतिरिक्त चार्ज वसूले जा रहे हैं। उद्यमियों के अनुसार, यह सीधे तौर पर RBI के उन दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है जो MSME क्षेत्र को राहत देने के लिए बनाए गए हैं। नियमानुसार, फ्लोटिंग रेट और MSME श्रेणी के तहत आने वाले ऋणों पर कोई भी बैंक या गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFC) प्री-पेमेंट या फोरक्लोजर पेनल्टी नहीं ले सकती। इसके बावजूद, ये कंपनियां नियमों को ताक पर रखकर मोटा मुनाफा कमाने में लगी हैं।
महीनों से दफ्तरों के चक्कर काट रहे उद्यमी
आज याने कि मंगलवार को पीड़ित ग्राहक फॉर्कलोसर के लिए मूल धन और ब्याज वाला चेक लेकर आदित्य बिरला कैपिटल के दफ्तर पहुंचे तो दफ्तर की जिम्मेदार अधिकारी ने चेक लेने से इनकार कर दिया। वही ग्राहक ने आरोप लगाया कि कंपनी के कर्मचारी उन्हें डराते धमकाते है। स्थानीय कर्मचारी ठीक से बात नहीं करते वहीं जब इनके वरिष्ठ कार्यालय के अधिकारियों से बात करवाने की बात की जाती है तो टालमटोल कर देते है और सख्त कार्रवाई करने की बात कहकर डराते है।
आगे शिकायतकर्ता ने बताया कि लोन देते समय कंपनी के कर्मचारी परिवार के सदस्य बन जाते हैं लेकिन जब मुनाफा कमाने की बात आती है तो दुश्मन की निगाहों से देखते है। लोन के फॉर क्लोजर पर दो प्रतिशत का वादा कर कंपनी अब मुकर रही है। उद्यमियों को महीनों तक दफ्तरों के चक्कर लगवाए जा रहे हैं ताकि देरी होने पर उनसे अधिक ब्याज वसूला जा सके। स्थानीय कार्यालयों में जिम्मेदार अधिकारियों की अनुपलब्धता और केवल ईमेल या कस्टमर केयर पर निर्भरता ने उद्यमियों की परेशानी और बढ़ा दी है। इसके अलावा, कम ब्याज दर वाली दूसरी संस्थाओं में लोन ट्रांसफर करने की कोशिश करने पर भी फोरक्लोजर चार्ज का डर दिखाकर ग्राहकों को रोका जा रहा है।
ब्याज दरों में दोहरी नीति का आरोप
उद्यमियों ने कंपनी की ब्याज नीति पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जब बाजार में दरें बढ़ती हैं, तो कंपनी उन्हें तुरंत लागू कर देती है, लेकिन दरों में कटौती होने पर उसका लाभ ग्राहकों को नहीं दिया जाता। इस व्यवस्था से जुड़ने वाले उद्यमी अब खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
क्या कहता है RBI का स्पष्ट नियम?
भारतीय रिजर्व बैंक के निर्देशानुसार, फ्लोटिंग रेट पर दिए गए ऋणों और MSME श्रेणी के उधारकर्ताओं को समयपूर्व भुगतान (Pre-payment) पर दंडात्मक शुल्क से राहत दी गई है। वित्तीय संस्थाओं की यह जिम्मेदारी है कि वे ग्राहकों को पारदर्शी और निष्पक्ष सेवा प्रदान करें।
अब सवाल यह उठता है कि यदि सरकार के दावों और नियामक संस्थाओं के सख्त निर्देशों के बावजूद जमीनी स्तर पर ऐसी वसूली जारी है, तो MSME क्षेत्र को मिलने वाली राहत कितनी प्रभावी है? स्थानीय उद्यमियों ने अब इस मामले में उच्च अधिकारियों और नियामक संस्थाओं से हस्तक्षेप की मांग की है।
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