रतलाम में महंगाई का चौतरफा हमला: अब दूध के दाम भी बढ़े, आम आदमी की थाली से लेकर चाय का प्याला तक हुआ महंगा

Inflation has hit Ratlam from all sides: Milk prices have also risen, making everything from a common man's plate to a cup of tea more expensive

रतलाम में महंगाई का चौतरफा हमला: अब दूध के दाम भी बढ़े, आम आदमी की थाली से लेकर चाय का प्याला तक हुआ महंगा

डेली जर्नल हिंदी डेस्क 

रतलाम, शहर की जनता पर महंगाई का एक और बड़ा बोझ पड़ गया है। पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की बढ़ती कीमतों के बाद अब आम आदमी की रसोई के सबसे अनिवार्य हिस्से—'दूध' के दामों में भी इजाफा कर दिया गया है। प्रशासन और पशुपालकों के बीच हुई बैठक के बाद अब रतलाम में दूध के दाम 2 रुपये बढ़ाकर 62 रुपये प्रति लीटर तय कर दिए गए हैं।

पशुपालकों और प्रशासन के बीच आपसी सहमति से फैसला

उप संचालक पशुपालन विभाग, श्री नवीन शुक्ला ने जानकारी देते हुए बताया कि दुग्ध उत्पादकों की बढ़ती लागत और विक्रेताओं के हितों के बीच सामंजस्य बैठाने के लिए यह निर्णय लिया गया है। एसडीएम रतलाम शहर आर्ची हरित की अध्यक्षता में पशुपालकों और दुग्ध व्यवसायियों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में पशु आहार के बढ़ते दामों और परिवहन लागत पर चर्चा के बाद आपसी सहमति से दूध का नया दाम 62 रुपये प्रति लीटर निर्धारित किया गया है।

आम आदमी की टूटी कमर: वेतन वही, खर्चे हजार

महंगाई की इस मार ने मध्यम और निम्न वर्ग के परिवारों के बजट को पूरी तरह बिगाड़ दिया है। शहरवासियों का कहना है कि एक तरफ कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम पहले से ही आसमान छू रहे हैं, वहीं अब दूध महंगा होने से घर का पूरा गणित बिगड़ गया है। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि जहाँ रोजमर्रा की हर वस्तु की कीमतें दोगुनी रफ्तार से बढ़ रही हैं, वहीं आम आदमी की तनख्वाह (Salary) सालों से वहीं की वहीं थमी हुई है।

रेस्टोरेंट और होटलों पर भी दिखेगा असर: अब महंगी मिलेगी चाय और नाश्ता

दूध के दामों में हुई इस बढ़ोतरी का सीधा असर शहर के होटलों और रेस्टोरेंट्स पर भी पड़ने वाला है। संचालकों का कहना है कि कमर्शियल गैस और दूध, दोनों महंगे होने के बाद अब चाय की कीमत बढ़ाना उनकी मजबूरी हो गई है। आने वाले दिनों में न केवल चाय का प्याला महंगा होगा, बल्कि नाश्ते और खाने की थाली की कीमतों में भी भारी उछाल देखने को मिल सकता है।

दाम बढ़ने के साथ शुद्धता की जांच भी है जरूरी: जनता की मांग

दूध के दामों में हुई इस बढ़ोतरी के बाद अब शहर की जनता ने प्रशासन से एक और बड़ी मांग की है। नागरिकों का कहना है कि यदि प्रशासन पशुपालकों के हित में दूध के दाम बढ़वा रहा है, तो उसे आम जनता की सेहत का भी ख्याल रखना चाहिए। बाजार में मिलने वाले दूध की शुद्धता और गुणवत्ता पर अक्सर सवाल उठते रहते हैं, ऐसे में खाद्य एवं औषधि प्रशासन (Food and Drugs Administration) को चाहिए कि वह शहर के डेयरी और दुग्ध व्यवसायियों की निरंतर जांच करे। मिलावटखोरों पर नकेल कसने के लिए नियमित रूप से दूध के सैंपल लिए जाएं और जांच अभियान चलाए जाएं, ताकि जनता को बढ़ी हुई कीमत पर कम से कम शुद्ध और सेहतमंद दूध मिल सके।

महंगाई का 'विषैला' चक्र

ईंधन की मार: पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों ने परिवहन को महंगा किया।

रसोई पर हमला: सीएनजी और कमर्शियल गैस की कीमतों ने होटलों का बजट बिगाड़ा।

दूध का झटका: अब 62 रुपये लीटर दूध ने बच्चों के पोषण और सुबह की चाय को महंगा कर दिया।

रतलाम की जनता के लिए यह 'महंगाई का मानसून' काफी कष्टदायक साबित हो रहा है। प्रशासन भले ही इसे सामंजस्य कह रहा हो, लेकिन धरातल पर आम आदमी के लिए अपनी बुनियादी जरूरतों को पूरा करना अब एक कड़ी चुनौती बनता जा रहा है।

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