जोमैटो राइडर्स का हल्ला बोल: शोषण के खिलाफ रतलाम में डिलीवरी बॉयज ने खोला मोर्चा, दिया कड़ा अल्टीमेटम
Zomato riders' attack: Delivery boys in Ratlam open front against exploitation, give stern ultimatum
डेली जर्नल हिंदी डेस्क
रतलाम, रतलाम में फूड डिलीवरी क्षेत्र में बड़ा उबाल आ गया है। यहाँ 'राइडर वेलफेयर एसोसिएशन जोमैटो' ने फूड डिलीवरी दिग्गज कंपनी जोमैटो की नीतियों के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान करते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। एसोसिएशन ने साफ़ तौर पर कंपनी पर आर्थिक शोषण का आरोप मढ़ा है। राइडर्स का कहना है कि वे पिछले 5 सालों से तपती धूप, कड़ाके की ठंड और मूसलाधार बारिश जैसे हर मौसम और विषम परिस्थितियों में बिना रुके लोगों तक भोजन पहुँचा रहे हैं, लेकिन कंपनी की मौजूदा नीतियां अब उन्हीं का शोषण कर रही हैं। सभी राइडर्स ने एकजुट होकर इस अन्याय के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की है।
शोषण बंद कर जायज मांगों को किया जाए पूरा
राइडर्स ने स्पष्ट किया कि उनकी कड़ी मेहनत का कंपनी द्वारा उचित मूल्य नहीं दिया जा रहा है और कंपनी की कार्यप्रणाली पूरी तरह केवल अपना मुनाफा कमाने पर केंद्रित है। इस कारण डिलीवरी बॉयज के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है, जिससे उनके परिवारों का भरण-पोषण मुश्किल हो गया है। इसी को लेकर सभी राइडर्स लामबंद हो गए हैं और शोषण बंद करने की मांग कर रहे हैं।
अपनी जायज माँगों को लेकर जोमैटो राइडर संघ ने एक 10 सूत्रीय नियम व शर्तों का मांग पत्र जारी किया है। इसमें मुख्य रूप से बेस फेयर 15 रुपये प्रति किलोमीटर करने और रात्रि 11 बजे से सुबह 8 बजे तक 10 रुपये नाइट अलाउंस देने की मांग की गई है। इसके अलावा, मल्टी-ऑर्डर पेमेंट में सुधार करते हुए 3 ऑर्डर पर मिलने वाले ₹32-33 को बढ़ाकर ₹50-60 करने, 2 किलोमीटर से अधिक की दूरी पर एक्स्ट्रा पिकअप चार्ज देने और रेस्टोरेंट में 15 मिनट से अधिक इंतजार करने पर तत्काल समाधान सुनिश्चित करने की बात भी कही गई है।
उग्र आंदोलन की चेतावनी
राइडर्स ने कंपनी को कड़ी चेतावनी दी है कि यदि जोमैटो ने स्विगी जैसी प्रतिस्पर्धी कंपनियों की तर्ज पर सुविधाएं और सपोर्ट सिस्टम में जल्द सुधार नहीं किया, तो वे बड़े और उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। अब देखना होगा कि कंपनी इस चेतावनी पर क्या कदम उठाती है।
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