रतलाम का मतदाता पुनरीक्षण पटरी से उतरा—कलेक्टर की सख्ती के बाद भी प्रशासनिक सिस्टम कटघरे में , समाज सेवी और जागरूक युवा कैंप लगाकर लोगों के फॉर्म भर रहे और दे रहे हिदायत
Ratlam's voter revision derailed—despite the Collector's strictness, the administrative system is under scrutiny. Social workers and aware youth are setting up camps to fill out people's forms and provide guidance
डेली जर्नल हिंदी
रतलाम, रतलाम में चल रहा निर्वाचक नामावली विशेष गहन पुनरीक्षण 2025–26 (SIR) जिस पारदर्शिता और तत्परता से होना चाहिए था, वह लक्ष्य अब तक दूर दिखाई दे रहा है। जिला प्रशासन ने बीएलओ की लापरवाही पर एक के बाद एक नोटिस, वेतन रोकने के निर्देश और निलंबन आदेश तो जारी कर दिए, लेकिन सवाल यह है कि क्या समस्या सिर्फ बीएलओ स्तर तक ही सीमित है या प्रशासन की अपनी मशीनरी ही सुस्त पड़ी रही?
जिले के कई मतदान केंद्रों पर गणना पत्रक न तो समय पर वितरित हुए और न ही डिजिटाइजेशन की प्रगति उम्मीद के आसपास पहुंच सकी। चुनाव प्रक्रिया से जुड़े जानकार साफ कह रहे हैं कि यह देरी केवल “कर्मचारियों की उदासीनता” नहीं, बल्कि प्रशासनिक निगरानी की विफलता का संकेत है। जब तक स्थिति बिगड़ नहीं गई, तब तक उच्च अधिकारियों को यह क्यों नहीं पता चला कि कई मतदान केंद्रों पर प्रगति शून्य है? कलेक्टर द्वारा जारी आदेशों के अनुसार कई बीएलओ अवकाश पर पाए गए, कुछ डिजिटाइजेशन शुरू ही नहीं कर पाए और कई फॉर्म लेने पहुंचे तक नहीं। लेकिन यहाँ जनता यह पूछ रही है कि— क्या अवकाश प्रतिबंध के आदेश समय पर और विधिवत तरीके से सभी कर्मचारियों तक पहुंचे थे? यदि आदेशों की सेवा ही संदेह के दायरे में हो, तो इतने कठोर कदम उठाने का आधार कितना मजबूत है?
गंभीर प्रश्न यह भी है कि तकनीकी मोर्चे पर स्थिति क्या थी। डिजिटाइजेशन का पूरा दारोमदार मोबाइल ऐप और ऑनलाइन पोर्टल पर है, और पिछले वर्षों की तरह इस बार भी सर्वर की सुस्ती, लॉगिन फेल्योर और नेटवर्क दिक्कतों की शिकायतें फील्ड से आती रहीं। क्या प्रशासन ने इन तकनीकी बाधाओं का समाधान पहले से सुनिश्चित किया था? यदि सिस्टम ही अटक जाता है, तो फिर उसके परिणामों का बोझ जनता और बीएलओ पर क्यों डाला जा रहा है?
मतदाता सूची के पुनरीक्षण में देरी केवल एक विभागीय कमी नहीं, बल्कि जनता के अधिकार पर सीधा खतरा है। हजारों नए मतदाता—18 वर्ष के युवक-युवतियां—अपना नाम सूची में जोड़ने का इंतजार कर रहे हैं। कई परिवारों के पते बदले हैं, कई को सुधार करना है, मगर जब गणना पत्रक ही घर-घर नहीं पहुंचे, तो दोष किसका माना जाए? बीएलओ की त्रुटियां अपनी जगह, परंतु जिला प्रशासन की धीमी प्रतिक्रिया और समीक्षा की कमी कहीं अधिक चिंताजनक है।
जनता के बीच यह भी चर्चा है कि क्या अचानक की जा रही दंडात्मक कार्रवाई किसी गहरी प्रशासनिक असफलता पर पर्दा डालने की कोशिश तो नहीं? यदि तैयारी, प्रशिक्षण, सामग्री वितरण और फील्ड मार्गदर्शन पहले से मजबूत होता, तो पुनरीक्षण कार्य इस स्थिति में नहीं पहुंचता। चुनावी प्रक्रिया जैसी संवेदनशील व्यवस्था में केवल दंड देने से काम नहीं चलता, व्यवस्था को ठीक करना ज़्यादा ज़रूरी है। मतदाता सूची लोकतंत्र का आधार दस्तावेज़ है। इसकी त्रुटियां चुनाव परिणामों से लेकर जनता के विश्वास तक, सब कुछ प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में रतलाम में पुनरीक्षण कार्य का इस तरह लड़खड़ाना गंभीर चेतावनी है कि प्रशासन को अपनी जिम्मेदारियों का पुनर्मूल्यांकन करना होगा।
फिलहाल कलेक्टर कार्यालय की सख्ती सुर्खियां तो बटोर रही है, लेकिन जनता इंतजार कर रही है उस सख्ती की जो “निचले स्तर पर कार्रवाई” से आगे बढ़कर “पूरी प्रशासनिक प्रणाली की जवाबदेही” तय करे—क्योंकि मताधिकार में देरी या त्रुटि का दंड आखिरकार जनता ही भुगतती है।
एसआईआर के लिए ई न्यूमरेशन फॉर्म भरने में आ रही समस्याएं, 13 से 15 दिनों बाद जिला निर्वाचन अधिकारी ने जारी किया फॉर्म भरने की कार्यशाला का नोटिफिकेशन
एसआईआर यानी ई न्यूमरेशन फॉर्म को मतदाताओं तक पहुंचा तो दिया लेकिन मतदाताओं और आमजन को कुछ बीएलओ की ओर कोई हिदायत नहीं दी गई और दी जा रही है। मतदाता अपना और परिवार का नाम 2003 की मतदाता सूची में ढूंढने के लिए मशक्कत कर रहे है। वहीं कुछ बीएलओतो देर रात तक भिड़े हुए है। अब तक मतदाताओं तक यह नहीं पहुंच पाया है, ई एन्यूमरेशन फॉर्म को किस तरह से भरना है। इसके लिए कई सामाजिक संस्थाएं और जिम्मेदार पढ़ें लिखे युवा जैसे टीम APCR और एक पहल फाउंडेशन संस्थाएं आगे आ कर गली मोहल्लों में कैंप लगाकर उनके फॉर्म भर रहे है। जबकि जिला निर्वाचन अधिकारी महोदया की ओर से फॉर्म भरने की जो कार्यशाला आयोजित होने का नोटिफिकेशन जारी किया है , उसे आज से 10 दिनों पहले ही जारी हो जाना चाहिए था। बीएलओ को तो ट्रेनिंग मिलने के बावजूद कुछ ना फॉर्म भरने में मदद कर रहे है और ना फॉर्म कैसे भरना है यह समझाया जा रहा है। यदि आप ई न्यूमरेशन फॉर्म भरना सीखना चाहते है तो नीचे दिए समय और केंद्रों पर शाम 4 बजे से 8 बजे तक पहुंच सकते है।

