संगति का व्यक्ति के जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है - सुंदर जोशी
Company has a deep impact on a person's life - Sundar Joshi
डेली जर्नल हिंदी डेस्क
जावरा, जन्म से ही कोई डाकू संत महात्मा या शिक्षक नहीं होता है परिस्थितियांँ और वातावरण पर यह सारी बातें निर्भर करती है। महर्षि वाल्मीकि के बारे में भी ऐसा ही कह सकते हैं घर की परिस्थितियों ने ही उन्हें डाकू बनाया लेकिन महर्षि नारद के संपर्क में आते ही उन्हें राम नाम के महत्व के ज्ञान की प्राप्ति हुई और वह रत्नाकर डाकू से आगे चलकर महर्षि वाल्मीकि के रूप में हमारे सामने प्रस्तुत हुए। भगवान राम का ध्यान करते-करते उनके शरीर पर वाल्मीकि जिसको आजकल उदी कहते हैं चढ़ गई थी ,कई वर्षों तक उन्होंने इस प्रकार भगवान राम की तपस्या की और रामायण की रचना की।
इनका जीवन सीखाता है कि एक साधारण व्यक्ति भी अपने ज्ञान तप और संगति के बल पर महान व्यक्ति बन सकता है। इन्होंने जीवन में न्याय धर्म और सत्य की शिक्षा में दी। उक्त विचार सुंदरलाल जोशी 'सूरज' (नागदा) ने वाल्मीकि जयंती के उपलक्ष में जावरा आयोजित काव्य समारोह में अतिथि के रूप में व्यक्त किए।इस अवसर पर आपने शरद पूर्णिमा के महत्व को भी रेखांकित किया।
काव्य समारोह के मुख्य अतिथि नीमच से पधारे वरिष्ठ साहित्यकार और शायर प्रमोद जी रामावत ने अपने शेर ,गीत और गजलों से सबका मन मोह लिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता डा प्रकाश उपाध्याय ने की आपने मधुर गीतों की प्रस्तुति से खूब वाहवाही लूटी। नागदा के कैलाश सोनी सार्थक ने हास्य की झड़ी लगा दी। कवयित्री वंदना, सुंदरलाल जोशी 'सूरज' , नंदकिशोर राठौर , भावसार जी ,मनोहरसिंह मधुकर और नागौर के कवि पुरोहित के शृंगार गीतों पर श्रोता झूम उठे। बंगाल से पधारे व्यंग्यकार पंकज साहा और रमेश मनोहरा की व्यंग्य रचनाओं ने अपनी अमिट छाप छोड़ी। फ़ज़ल हयात की शायरी का श्रोताओं ने तालियों से स्वागत किया। सुमधुर संचालन राजेंद्र श्रोत्रिय ने किया आभार बाबूलाल नाहर ने माना। बड़ी संख्या में रसिक श्रोताओं ने काव्य संध्या का आनंद लिया।
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