जिला शिक्षा विभाग में ज़ि पं सीईओ की नाक के नीचे बीएससी और सीएसी शिक्षकों की भर्ती के लिए हुई काउंसलिंग में धांधली, हाई कोर्ट और लोक शिक्षण संचालनालय के आदेश  की उड़ाई धज्जियां, कई अपात्र शिक्षक काउंसलिंग हो गए शामिल

Under the nose of the District Education Department, under the nose of the District Panchayat CEO, there was rigging in the counseling for the recruitment of B.Sc. and C.A.C. teachers

जिला शिक्षा विभाग में ज़ि पं सीईओ की नाक के नीचे बीएससी और सीएसी शिक्षकों की भर्ती के लिए हुई काउंसलिंग में धांधली, हाई कोर्ट और लोक शिक्षण संचालनालय के आदेश  की उड़ाई धज्जियां, कई अपात्र शिक्षक काउंसलिंग हो गए शामिल

डेली जर्नल हिंदी डेस्क 

रतलाम, ऐसा लगता है कि रतलाम का शिक्षा विभाग किसी दबाव में या तो फिर भांग खाकर कार्य कर रहा है। क्योंकि BAC और CAC के रिक्त पदों को भरने के लिए कई सालों बाद काउंसलिंग हुई, इसमें भी ग्वालियर इंदौर हाई कोर्ट, राज्य शिक्षा केंद्र और लोक शिक्षण संचालनालय मध्यप्रदेश के आदेश को ताक में रख कर धांधली कर ली। शिक्षा विभाग के जिम्मेदारों ने तो अपने वरिष्ठ अधिकारियों तक की आंखों में धूल झुक दी। दरअसल बीएसी और सीएसी के रिक्त पदों को भरने के आदेश जारी हुए थे लेकिन शिक्षा विभाग ने तो अपनी मनमानी करते हुए जो प्रतिनियुक्ति से पद पर थे उन्हें ही हटा दिया और उनकी जगह रिक्त कर नई विभागीय भर्ती कर दी। इतना ही नहीं इन्होंने तो प्रति नियुक्ति पद पर पदस्थ BAC और CAC शिक्षकों को काउंसलिंग में शामिल होने का मौका भी नहीं दिया जबकि साल 2019 में खुद राज्य शिक्षा केंद्र ने उच्च न्यायालय जबलपुर ग्वालियर इंदौर खंडपीठ के आदेश का हवाला देते हुए लिखा था कि –

माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर, माननीय उच्च न्यायालय खण्डपीठ वालियर व इंदौर में पारित आदेश के परिपालन में प्रकरण में शासन द्वारा निम्नानुसार अनुमति दी गई है "जिन जिलों में बीएसी एवं जनशिक्षक जिन्हें प्रतिनियुक्ति पर रहते हुए 4 वर्ष पूर्ण हो चुके है तथा जो पूर्व में उक्त पद पर कार्यरत रहे हो एवं उनकी आयु 1.1.2015 की स्थिति में 49 वर्ष से अधिक न हो, को बीएसी एवं जनशिक्षक के पद हेतु काउसलिंग में सम्मिलित करा दिया जाए।

वहीं शिक्षा विभाग  लोक शिक्षण संचालनालय मध्यप्रदेश का आदेश जो 10 सितंबर 2025 को जारी हुआ, उसे भी समझने में कही भूल कर रहा है या फिर यू कहें कि जानबूझकर इसे नजरअंदाज कर अपने जिला स्तरीय आदेश में इसका हवाला ना देते हुए धूल झोंकी जा रही है। 10 सितंबर 2025 को जारी हुए आदेश में भी कहीं नहीं लिखा है कि प्रति नियुक्ति वाले बीएससी (BAC) और सीएसी (CAC ) शिक्षक को पद से हटा दिया जाए। वहीं इसी आदेश में साफ-साफ लिखा है कि प्रतिनियुक्ति शब्द को सेवाएं समझा जाए। क्योंकि प्रतिनियुक्ति शब्द से सेवा के प्रतिनियुक्ति के संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी किये गये परिपत्रों निर्देशों एवं विभागीय स्थानांतरण नीति, 2022 की कंडिका 2.19 के प्रावधानों से स्पष्ट है कि 'प्रतिनियुक्ति' से तात्पर्य “एक विभाग से दूसरे विभाग में पदस्थापना" से है। समग्र शिक्षा अभियान परियोजना राज्य शिक्षा केन्द्र अंतर्गत संचालित है, जो कि स्कूल शिक्षा विभाग के अधीन है। ऐसी स्थिति में शिक्षकों की सेवायें स्कूल शिक्षा विभाग अंतर्गत वस्तुतः एक विभागाध्यक्ष से दूसरे विभागाध्यक्ष के नियंत्रण में सौंपी जाती हैं। इस प्रक्रिया में 'प्रतिनियुक्ति' शब्द के प्रयोग से सेवा शर्तों के बारे में भ्रम की स्थिति निर्मित होती है। इस संबंध में लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा दिनांक 10/09/2025 को जारी निर्देश द्वारा यह स्पष्ट किया गया है कि विषयांकित कार्यवाही प्रतिनियुक्ति की श्रेणी में नहीं आती है एवं इस हेतु प्रति नियुक्ति शब्द का उपयोग नहीं किया जाए।

जबकि रिक्त पदों को भरने हेतु 2023 में आदेश जारी किया गया था जिसे विलंब करते हुए 15 दिसंबर को काउंसलिंग का मुहूर्त आया और उसमें भी कुछ मिली भगत और अपनों को फायदा देने वाले शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों ने काउंसलिंग में नियमों और आदेश के विपरीत जा कर धांधली कर दी। 

लोक शिक्षण संचालनालय मध्यप्रदेश द्वारा 10 सितंबर 2025 को जारी आदेश के बिंदु क्रमांक 7 में साफ तौर पर लिखा है कि ऐसे शिक्षक जो जिले में समग्र शिक्षा अभियान अंतर्गत या जिला प्रौढ शिक्षा कार्यालय अंतर्गत पूर्णकालिक रूप से कार्यरत हैं किन्तु एजुकेशन पोर्टल 3.0 पर अपडेट नहीं है, उनकी जानकारी पोर्टल पर अपडेट कर ई होगी। ऐसे सभी शिक्षकों का वेतन आहरण भी उसी पद से किया जाये जिस पद पर संबंधित की सेवाएं ली गई है। इस व्यवस्था से स्कूलों में ऐसे शिक्षकों के स्थान पर, जिनकी सेवाएं सर्वशिक्षा अभियान इत्यादि में ली गई है, इनकी जगह पर अतिथि शिक्षक व्यवस्था की जा सकेगी जिससे स्कूलों की शैक्षणिक व्यवस्था प्रभावित नही होगी। लेकिन काउंसलिंग ऐसे समय पर की गई जब बोर्ड परीक्षाएं नजदीक है जिसमें शैक्षणिक व्यवस्था प्रभावित होने की संभावना अधिक है। 

नियमों की अनदेखी, अपात्र प्राथमिक और रिटायर्ड शिक्षकों भी हो गए काउंसलिंग में शामिल

पहले तो काउंसलिंग करने में सालों लग गए इसके बाद अब काउंसलिंग तय हुई तो इसे करने के लिए स्थान चुन्नी में भी असमंजस बना रहा और अंत में एक दिन पहले काउंसलिंग शामिल होने वालों को स्थान की जानकारी मिली, इसके बाद जब 15 दिसंबर को काउंसलिंग हुई तो प्रतिनियुक्त वाले पात्र शिक्षकों को एपीसी विवेक नागर द्वारा बाहर कर दिया। वहीं पदभार प्राथमिक को मौका दे दिया जबकि काउंसलिंग में शामिल होने के लिए वरिष्ठता पर माध्यमिक शिक्षक अनिवार्य है। जबकि हाई कोर्ट ने पद प्रभार की वैल्यू शून्य की है। 

जहां विज्ञान स्नातक की पात्रता वहां बीए गणित शिक्षक हुए अप्वाइंट

काउंसलिंग में अनदेखी ऐसी भी कि जहां विज्ञान स्नातक माध्यमिक शिक्षक की जनशिक्षक के पद पर पदस्थापना होनी थी वहां कला स्नातक शिक्षक की पदस्थापना कर दी गई है, ऐसा भाटी बडोदिया जनशिक्षा केंद्र पर किया गया। लेकिन इसके बावजूद जिम्मेदार अनदेखी और नियमों और आदेशों का उलंघन करते बीते सोमवार काउंसलिंग में नजर आए। 

प्रभारी डीपीसी नहीं दे पाए जवाब, बोले स्थापना से पता करना पड़ेगा

इसी सम्बन्ध में जब प्रभारी डीपीसी राजेश झा से संपर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि 10 सितंबर 2025 के आदेश अनुसार ही कार्रवाई की गई है वहीं जब आदेश अनुसार प्रतिनियुक्ति वाले शिक्षकों को हटाने और इनपर यह काउंसलिंग लागू नहीं होने की वजह को लेकर सवाल किया तो प्रभारी डीपीसी बोले स्थापना में पता करना पड़ेगा।  आयुक्त लोक शिक्षण भोपाल के पत्र दिनांक 10 सितंबर 2025 में स्पष्ट किया है कि जो वर्तमान में समग्र शिक्षाअभियान में पूर्णकालिक रूप से कार्यरत है उन्हें पोर्टल पर दर्ज करना है, हटाने को लेकर कोई उल्लेख नहीं है। बता दें कई शिक्षकों ने कोर्ट की तरफ रुख किया है तो कुछ इसके खिलाफ ज्ञापन देने की तैयारी में है।