दर बदर भटक रहे हाथ ठेला फल व्यापारी, अतिक्रमण की कार्रवाई में हो रही परेशानी को कोई सुनने को तैयार नहीं
Handcart fruit vendors are wandering from pillar to post, with no one willing to listen to the problems they face due to encroachment action
डेली जर्नल हिंदी डेस्क
रतलाम, भाजपा सरकार एक तरफ बहनों लाडली कहकर वाह वाही बटौर रही और इन्हीं के नाम पर वोट भी मांगे फिर सत्ता में भी आ गए लेकिन अब शायद इन लाडली बहनों का कोई काम नहीं इसलिए शायद बहने रतलाम के ऐसे विधायक के बंगले के बाहर बैठकर धरने देने को मजबूर है जो उनकी समस्याएं आ कर सुन भी नहीं सकते और ना उनके ही महापौर कोई सुनवाई कर प रहे। विधायक जी शहर में रहेंगे तो जनता को सुनेंगे वैसे तो जब मंत्री नहीं बने थे तब भी कहां जनता की सुनवाई कर लेते थे। इनके कर्मचारियों के पास एक डायलॉग था और है जो इन्हें रावत गया है, वो यह कि कोई समस्या लेकर आए तो यही बोलना है कि विधायक जी बाहर है, आएंगे तो उन्हें बता दिया जाएगा। बुधवार को फल फ्रूट व्यापारियों ने विधायक चेतन कश्यप के बंगले के बाहर धरना प्रदर्शन किया लेकिन वहां से भी केवल तीन दिनों का आश्वासन देकर उन्हें भेज दिया गया।
फल फ्रूट की छुट्टी व्यापारी जो सड़क किनारे अपना ठेला लगाकर रोज की कमाई कर अपना परिवार चलते हैं वे पिछले तीन दिनों से दर-दर भटकने को मजबूर है ना तो महापौर सुनवाई कर रहे ना विधायक। महापौर प्रहलाद पटेल नेता पहले दिन ही इनसे मिलने को लेकर तलम टोल किया गया। बुधवार को फल फ्रूट व्यापारी पहले पूर्व गृहमंत्री हिम्मत कोठारी के यहां पहुंचे इसके बाद वे विधायक मंत्री चेतन्य काश्यप के यहां पहुंचे यहां जमकर प्रदर्शन किया लेकिन यहां भी तीन दिनों का आश्वासन देकर उन्हें भेज दिया। छोटे व्यापारियों के हित बात करने वाले महापौर केवल रील में ही लोगों की समस्या सुनते है लेकिन असलियत से रहते है किसी दूर।
व्यापारियों के हित की बात तो नहीं बनी लेकिन अतिक्रमण मुक्त रतलाम बनाने की कार्रवाई में देखना यह है कि रसूखदारों के अतिक्रमण हटेंगे या नहीं या फिर नेतागिरी के आगे ही नतमस्तक होना पड़ेगा।